बिलावल भुट्टो ने मानी आतंकियों से साठगांठ, बोले- यह बात किसी से छिपी नहीं है

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के नेताओं और मंत्रियों की ओर से आतंक को समर्थन देने की बात खुलकर सामने आ रही है। भारत की सख्त चेतावनियों और जवाबी कार्रवाई की आशंका के चलते पाकिस्तानी नेतृत्व की घबराहट ने दुनिया को उनका असली चेहरा दिखा दिया है।
पहलगाम में हुए हमले में 26 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर है। इसके बाद पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भी कबूल कर लिया कि उनके देश के आतंकी संगठनों से रिश्ते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बात किसी से छिपी नहीं है, पाकिस्तान का इतिहास ऐसा ही रहा है।
बिलावल भुट्टो का यह बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उस स्वीकारोक्ति के बाद आया है, जिसमें उन्होंने माना था कि पाकिस्तान ने आतंकियों को समर्थन और फंडिंग दी है। बिलावल ने स्काई न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, “जहां तक हमारे अतीत का सवाल है, यह कोई रहस्य नहीं है। हमने आतंकवाद और कट्टरपंथ के कारण काफी नुकसान झेला है। लेकिन हमने इससे सबक लेकर सुधार भी किए हैं।” उन्होंने माना कि पाकिस्तान का आतंकवाद से जुड़ा अतीत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन अब वह इससे उबरने की कोशिश कर रहा है।
गुरुवार को मीरपुर खास की एक रैली में बिलावल भुट्टो ने फिर से भारत को अप्रत्यक्ष रूप से धमकाते हुए कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है, लेकिन अगर उकसाया गया तो युद्ध के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा, “हम शांति पसंद करते हैं, लेकिन अगर कोई हम पर हमला करता है, तो उसका जवाब भी देंगे। हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन उकसाए गए तो हमारी दहाड़ गूंजेगी।”
रक्षा मंत्री ने भी स्वीकारी पाकिस्तान की भूमिका
कुछ दिन पहले स्काई न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी माना कि उनका देश दशकों से आतंकियों को समर्थन देता रहा है। उन्होंने कहा, “हमने अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए यह गंदा काम किया है। यह एक भारी गलती थी, जिसकी कीमत हमें चुकानी पड़ी। अगर हम सोवियत युद्ध और 9/11 के बाद अमेरिका की लड़ाई में शामिल न होते, तो पाकिस्तान का रिकॉर्ड साफ-सुथरा होता।”

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