जम्मू (पुंछ): पहली बार पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बढ़ते तनाव के बीच जिला अस्पताल की छतों पर रेडक्रॉस के चिन्ह बनाए गए हैं। इससे पहले 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी, जब पुंछ में भारी गोलाबारी हुई थी, तब भी अस्पतालों पर ऐसे चिन्ह नहीं बनाए गए थे। हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। एलओसी पर युद्ध जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए, पुंछ के राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल की छतों पर रेडक्रॉस के बड़े-बड़े निशान बनाए गए हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय युद्ध नियमों के तहत अस्पताल को गोलीबारी से सुरक्षित रखा जा सके। युद्ध के दौरान यह नियम है कि अस्पतालों पर किसी भी देश की सेना हमला नहीं करती।
पहली बार बनाए गए रेडक्रॉस के चिन्ह
पुंछ में यह अभूतपूर्व कदम है। यहां तक कि कारगिल युद्ध में भी ऐसा नहीं किया गया था। हालात की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के सभी अस्पतालों को सतर्क कर दिया गया है। चिकित्सा स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और एलओसी व सीमा से सटे क्षेत्रों में अतिरिक्त मेडिकल टीम को तैनात किया गया है। संवेदनशील इलाकों में एंबुलेंस की संख्या भी बढ़ाई गई है। शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जम्मू में भी अतिरिक्त इंतज़ाम किए गए हैं।
एलओसी पर तनाव का सीधा असर
पाकिस्तान की ओर से संभावित गोलीबारी को देखते हुए एलओसी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। पिछले अनुभव बताते हैं कि भारत-पाक तनाव के समय सीमावर्ती आबादी को गोलीबारी का खामियाजा भुगतना पड़ता है। जम्मू संभाग के कठुआ, सांबा और जम्मू ज़िले लंबी सीमा रेखा से जुड़े हुए हैं। वहीं पुंछ और उड़ी जैसे इलाके भी तनाव के प्रभाव में हैं।
जम्मू संभाग के सभी अस्पताल अलर्ट पर
2018 के बाद से एलओसी और सीमावर्ती क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत थे, लेकिन हालिया आतंकी हमले ने स्थिति बदल दी है। सीमा पर पाकिस्तान लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अब्दुल हमीद जरगर के अनुसार, जम्मू संभाग के सभी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, खासकर सीमांत क्षेत्रों में विशेष तैयारी की गई है। जीएमसी जम्मू में भी आपात सेवाओं को और मजबूत किया गया है।






