सिंधु जल संधि: बूंद-बूंद पानी को तरस रहे पाकिस्तान की भारत से वार्ता की गुहार

पानी की किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत से बातचीत की मांग की है। पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा ने इस संबंध में भारत की जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देवश्री मुखर्जी को पत्र लिखा है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारत द्वारा लिए गए सख्त कदमों के चलते पाकिस्तान पर दबाव बढ़ गया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारत ने पाकिस्तान को सैन्य मोर्चे पर झटका देने के साथ-साथ सिंधु जल संधि को निलंबित कर उसे जल संकट की ओर धकेल दिया है। अब खबर है कि पाकिस्तान ने भारत से फिर से वार्ता की इच्छा जताई है। सूत्रों के अनुसार, सैयद अली मुर्तजा ने भारत द्वारा संधि को निलंबित करने की औपचारिक सूचना का जवाब देते हुए पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने भारत की आपत्तियों पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही है। मुर्तजा ने लिखा है कि सिंधु नदी से प्राप्त जल पर लाखों लोगों की निर्भरता है, ऐसे में भारत को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत इस संधि पर एकतरफा फैसला नहीं ले सकता। जल शक्ति मंत्रालय ने इस पत्राचार पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
पाकिस्तान की यह पहल उसकी बेचैनी को उजागर करती है। गौरतलब है कि भारत ने इससे पहले जनवरी 2023 और सितंबर 2024 में पाकिस्तान को वार्ता के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन तब पाकिस्तान ने कोई जवाब नहीं दिया। अब जब भारत ने समझौता निलंबित कर दिया है और चिनाब नदी पर बगलिहार और सलाल परियोजनाओं में फ्लशिंग व डिसिल्टिंग का काम शुरू कर दिया है, तब पाकिस्तान ने संवाद की अपील की है।

22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत का फैसला
पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 23 अप्रैल को सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का ऐलान किया था। यह कदम सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को जवाब देने के तौर पर उठाया गया। इस संधि के तहत सिंधु नदी पर पाकिस्तान की कृषि और पेयजल व्यवस्था काफी हद तक निर्भर है।

भारत की आपत्तियां और संधि उल्लंघन
देवश्री मुखर्जी द्वारा लिखे गए पत्र में उल्लेख किया गया कि पाकिस्तान ने भारत के वार्ता प्रस्तावों को नजरअंदाज किया और संधि की शर्तों का उल्लंघन किया है। इसी कारण भारत ने इसे स्थगित करने का निर्णय लिया।

संघर्ष विराम के बावजूद संधि निलंबित
चार दिन तक चले सैन्य संघर्ष के बाद 10 मई को संघर्ष विराम लागू हो गया, लेकिन सिंधु जल संधि पर लगाया गया प्रतिबंध अभी भी जारी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने यह विराम अपनी शर्तों पर लागू किया है।

सिंधु जल समझौते की पृष्ठभूमि
1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि में विश्व बैंक की मध्यस्थता थी। इसमें पूर्वी नदियाँ ब्यास, रावी और सतलुज भारत को दी गईं जबकि पश्चिमी नदियाँ सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान को आवंटित हुईं। भारत को केवल 30% और पाकिस्तान को 70% जल प्राप्त होता है।

पाकिस्तान की बढ़ती परेशानी
भारत के निर्णय से पाकिस्तान में पानी का संकट और गहराता जा रहा है। कानून और न्याय मामलों के पाकिस्तानी राज्य मंत्री अकील मलिक ने कहा है कि वे इस मुद्दे को स्थायी न्यायालय, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और विश्व बैंक में उठाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इन सभी मंचों से उन्हें ज्यादा राहत मिलने की संभावना नहीं दिख रही है।

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