सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत केंद्रीय उत्पाद शुल्क के प्रधान आयुक्त के बेटे द्वारा दायर अनुकंपा नियुक्ति की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब परिवार के पास पर्याप्त संपत्ति और आय के स्रोत मौजूद हैं, तो अनुकंपा नियुक्ति का कोई औचित्य नहीं बनता।
जयपुर निवासी याचिकाकर्ता रवि कुमार जेफ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण और राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान और न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भुयान ने कहा कि जब आप एक उच्च पदस्थ अधिकारी के पुत्र हैं, जिनके परिवार के पास जयपुर में दो घर, 33 एकड़ कृषि भूमि और ₹85 हजार रुपए मासिक पेंशन है, तो अनुकंपा नियुक्ति की मांग उचित नहीं कही जा सकती। न्यायमूर्ति मनमोहन ने भी टिप्पणी की कि इतने संसाधनों के होते हुए अनुकंपा नियुक्ति की मांग तर्कसंगत नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं है और याचिका में कोई ठोस आधार भी नहीं है। इसके अलावा याचिका काफी देरी से दाखिल की गई थी। इन सभी कारणों से सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता के पिता की मृत्यु 27 अगस्त 2015 को जयपुर में कार्यरत रहते हुए हुई थी। इसके बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर मामला पहले केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण और फिर राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था।





