ठाकरे के हिंदी-विरोधी रुख के चलते फडणवीस सरकार ने त्रिभाषा लागू करने का आदेश वापस लिया

सरकार ने पहली से पांचवीं तक हिंदी भाषा को अनिवार्य करने का दिया था आदेश,

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने राज्य में हिंदी के खिलाफ आंदोलन करने का ऐलान किया

महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर सियासी खींचतान और तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने मिलकर राज्य में हिंदी के खिलाफ आंदोलन करने का ऐलान किया है। हालांकि, सत्ताधारी दलों ने इसे ठाकरे बंधुओं की ओर से मराठी वोट बैंक साधने की नई चुनावी रणनीति बताया है।
मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में तीन भाषा नीति से जुड़े दोनों सरकारी आदेशों (जीआर) को रद्द करने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा अनिवार्य रहेगी और हिंदी को वैकल्पिक विषय के तौर पर रखा जाएगा। इसके अलावा तीन भाषा नीति पर सुझाव देने के लिए डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति बनाने की भी घोषणा की गई, जो अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ठाकरे ने ही तीन भाषा नीति लागू करने का फैसला किया था। तब उनकी पार्टी के उपनेता, जो उस वक्त समिति में सदस्य थे, ने हिंदी और अंग्रेजी को दूसरी भाषा के रूप में बारहवीं तक पढ़ाने की सिफारिश की थी। अब वही लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने 5 जुलाई को मुंबई में त्रिभाषा नीति के विरोध में संयुक्त मार्च निकालने की घोषणा की है। सत्ताधारी गठबंधन ने इसे मराठी अस्मिता के नाम पर ठाकरे बंधुओं का चुनावी स्टंट करार दिया।

“हम हिंदी के खिलाफ नहीं”
रविवार को दक्षिण मुंबई में विरोध प्रदर्शन के दौरान उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसे जबरन थोपे जाने का विरोध कर रही है। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने तीन भाषा नीति वाले सरकारी आदेश की प्रतियां भी जलाईं। गौरतलब है कि हिंदी के मुद्दे पर ठाकरे बंधुओं के रिश्तों में नज़दीकी बढ़ी है। लगभग दो दशकों से अलग-अलग राजनीतिक राह पर चलने वाले उद्धव और राज ठाकरे ने इस बार मराठी भाषा के समर्थन में एकजुट होने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि मराठी मानुष के हितों से बड़ा कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए पहली से पांचवीं तक हिंदी पढ़ाई को अनिवार्य करने के फैसले के खिलाफ 5 जुलाई को संयुक्त प्रदर्शन करेंगे।

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