
हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर दफ्तर पहुंची पुलिस, यौन शोषण व कथित धर्मांतरण साजिश का खुलासा
आईटी कंपनी टीसीएस की नासिक इकाई में सामने आए यौन शोषण और कथित जबरन धर्मांतरण प्रकरण की एसआईटी जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच के अनुसार, एचआर मैनेजर निदा खान पर कर्मचारियों की करीब 70 शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप है। शिकायतों में यह भी कहा गया है कि कुछ आरोपियों ने महिला कर्मचारियों पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला और धार्मिक आचरण अपनाने के लिए मजबूर किया। मामले के तार विदेश से जुड़े होने की आशंका भी जताई जा रही है और निदा खान के संभावित कनेक्शन की जांच जारी है।
एचआर मैनेजर पर साजिश का आरोप
एसआईटी के मुताबिक, निदा खान इस पूरे मामले की मुख्य साजिशकर्ता हो सकती हैं, जिन्होंने शिकायतों को दबाने और आरोपियों को बचाने की कोशिश की। जांच में करीब 78 संदिग्ध कॉल, ईमेल और चैट रिकॉर्ड सामने आए हैं। साथ ही संदिग्ध आर्थिक लेन-देन के संकेत भी मिले हैं। आरोप है कि पीड़ितों को बार-बार मामला भूलने के लिए कहा गया और आंतरिक शिकायत तंत्र सक्रिय होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जांच एजेंसियों को कुछ व्हाट्सएप चैट भी मिले हैं, जिनमें विदेशी लिंक से जुड़े संदिग्ध संपर्कों के संकेत हैं। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि दफ्तर के भीतर एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। पुलिस ने ऐसे ग्रुप भी चिन्हित किए हैं, जहां कथित तौर पर सहकर्मियों को निशाना बनाने और योजना बनाने की चर्चा होती थी। डिलीट किए गए डेटा को फॉरेंसिक तकनीक से पुनर्प्राप्त किया जा रहा है। अब तक 12 कर्मचारियों की पहचान की जा चुकी है और सात आरोपियों—आसिफ अंसारी, तौफीक अत्तर, दानिश शेख, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी और शफी शेख—को गिरफ्तार किया गया है। मामले की शुरुआत फरवरी में मिली शिकायत से हुई, जिसके बाद पुलिस ने गुप्त ऑपरेशन चलाया। महिला पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में करीब दो सप्ताह तक दफ्तर में तैनात किया गया। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों के व्यवहार पर नजर रखी और अहम सूचनाएं जुटाईं, जिससे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
एजीएम को न्यायिक हिरासत, मुख्य आरोपी फरार
मामले में टीसीएस की एजीएम अश्विनी अशोक चैनानी को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, मुख्य आरोपी मानी जा रही निदा खान अभी फरार है और उसकी तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों को किसी संगठन या विदेशी स्रोत से आर्थिक सहायता तो नहीं मिल रही थी। पुख्ता सबूत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामला दर्ज होने के बाद भी कुछ अधिकारियों के आरोपियों से संपर्क में रहने के संकेत मिले हैं। कॉल और ईमेल रिकॉर्ड के आधार पर संभावित मिलीभगत की जांच जारी है। अब तक कुल 9 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें उत्पीड़न, प्रताड़ना और कथित जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप शामिल हैं। यह गतिविधियां वर्ष 2022 से जारी होने की बात सामने आई है।
महिला आयोग की जांच समिति गठित
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए एक तथ्य-खोज समिति का गठन किया है। चार सदस्यीय यह टीम 17 अप्रैल को संबंधित इकाई का दौरा कर मौके पर जांच करेगी। समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश, पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सुप्रीम कोर्ट की वकील और आयोग की प्रतिनिधि शामिल हैं।
यह टीम पीड़ितों, पुलिस और कंपनी प्रबंधन से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम का मूल्यांकन करेगी, संभावित लापरवाही की पहचान करेगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए सिफारिशें देगी। साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुझाव भी पेश किए जाएंगे। समिति अपनी रिपोर्ट 10 कार्य दिवसों में सौंपेगी।





