भारत में आधे से ज्यादा वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं, और 30% से भी कम गाड़ियों के पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र है। यह रिपोर्ट साफ तौर पर दिखाती है कि भारत में वाहन संख्या के मुकाबले कानूनों का पालन बेहद कमजोर है। लोगों को केवल वाहन खरीदने की नहीं, बल्कि उसे कानूनी रूप से जिम्मेदारी के साथ चलाने की जरूरत है।
देश में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनके लिए जरूरी कानूनी दस्तावेज जैसे बीमा (इंश्योरेंस) और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUCC) की अनदेखी हो रही है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 50% से ज्यादा वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या दोपहिया वाहनों की है।
कुछ राज्यों में प्रदूषण प्रमाण पत्र की स्थिति बेहद खराब
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रदूषण प्रमाण पत्र की अनुपालन दर 30% से भी कम है। यह दर्शाता है कि गाड़ियों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन नियमों का पालन नहीं हो रहा।
दक्षिण भारत में स्थिति थोड़ी बेहतर
रिपोर्ट में बताया गया है कि आंध्र प्रदेश और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र का अनुपालन लगभग 9.6% है, जबकि उत्तर भारत में यह दर सिर्फ 5.6% है। उत्तर भारत में सबसे बड़ी समस्या एक्सपायर्ड बीमा की है, जबकि दक्षिण भारत में पीयूसीसी का अभाव अधिक है।
महाराष्ट्र सबसे पीछे, राजस्थान कुछ बेहतर
महाराष्ट्र में नियमों के अनुपालन की दर मात्र 1.9% है, जो देश में सबसे कम है। राजस्थान में यह दर 6.74% है, जिससे साफ है कि अलग-अलग राज्यों में वाहन नियमों को लेकर स्थिति अलग-अलग है।
फास्टैग का उपयोग बढ़ा, लेकिन दस्तावेजों की लापरवाही जारी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जून 2024 से जून 2025 के बीच फास्टैग टोल कलेक्शन में 17.53% की वृद्धि हुई है और औसतन फास्टैग वॉलेट बैलेंस 408 रुपये रहा। यह दिखाता है कि लोग डिजिटल पेमेंट अपना रहे हैं, लेकिन जरूरी दस्तावेजों के मामले में लापरवाही कर रहे हैं।
ट्रैफिक चालान का भारी बोझ
देश में ट्रैफिक चालान को लेकर भी चिंता की स्थिति है। 2015 से अब तक कुल 5.11 लाख करोड़ रुपये के चालान काटे जा चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल 1.92 लाख करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है। बाकी 3.18 लाख करोड़ रुपये अदालतों में लंबित हैं और लगभग 7.69 करोड़ चालान कोर्ट में अटके हुए हैं।





