डायबिटीज सिर्फ आंखों, किडनी और हृदय को ही नहीं, बल्कि हड्डियों को भी धीरे-धीरे कमजोर और खोखला बना रही है।
यह बीमारी केवल ब्लड शुगर का स्तर बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय के साथ शरीर के लगभग हर अंग पर असर डालती है। हालिया शोध से पता चला है कि यह हड्डियों के लिए भी गंभीर खतरा है। अध्ययन में सामने आया कि जिन मरीजों का शुगर नियंत्रण में नहीं था, उनकी हड्डियां अधिक लचीली, कमजोर और फ्रैक्चर के प्रति संवेदनशील थीं।
शोध में 20 से 60 वर्ष आयु वर्ग के मरीज शामिल थे, जिनमें 35 से 45 वर्ष के रोगी सबसे ज्यादा प्रभावित पाए गए। न्यूरोपैथी, रेटिनोपैथी और नेफ्रोपैथी से पीड़ित मरीजों में मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं ज्यादा देखी गईं। महिलाओं में यह दिक्कत पुरुषों की तुलना में अधिक थी और शहरी मरीज ग्रामीणों की अपेक्षा ज्यादा प्रभावित पाए गए।
अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
• 400 मधुमेह रोगियों में 35.5% में हड्डी और जोड़ों की समस्याएं पाई गईं।
• सबसे आम दिक्कतें: घुटनों व जोड़ों का दर्द (12.25%), फ्रोजन शोल्डर (8%) और चार्कोट जॉइंट (3.5%)।
• जिनका शुगर नियंत्रण खराब था (औसत HbA1c 9.59), उनमें हड्डियों की समस्याएं अधिक रहीं।
मुख्य कारण
• ब्लड शुगर का असंतुलन: लंबे समय तक उच्च शुगर स्तर हड्डी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
• इंसुलिन की कमी: यह न केवल ब्लड शुगर नियंत्रित करता है, बल्कि हड्डियों के निर्माण में भी अहम है।
• नसों और आंखों पर असर: नसों की कमजोरी से संतुलन बिगड़ता है, गिरने का खतरा बढ़ता है और फ्रैक्चर की संभावना बढ़ जाती है।
चिकित्सकों की राय
मधुमेह हर स्तर पर खतरनाक है। टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों में हड्डियां विशेष रूप से अधिक कमजोर और लचीली हो सकती हैं। 400 मरीजों पर हुए इस अध्ययन में हड्डी-जोड़ की समस्याओं का बढ़ता आंकड़ा चिंता का विषय है।






