दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को हटाने से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नई तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया। इस मामले की सुनवाई गुरुवार, 14 अगस्त को होगी।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने एक वकील की दलील सुनने के बाद यह कदम उठाया। वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न पीठों के आदेश आपस में विरोधाभासी हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने बड़ी पीठ गठित कर मामले की सुनवाई कराने का निर्णय लिया।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, “आवारा कुत्तों से परेशान शहर, बच्चे चुका रहे कीमत” मामले की सुनवाई अब जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ करेगी।
यह याचिका कॉन्फ्रेंस फॉर ह्यूमन राइट्स (इंडिया) संगठन ने 2024 में दायर की थी, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण को लेकर दायर जनहित याचिका पर विचार से इंकार कर दिया गया था।
वकील ने मई 2024 के एक आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पीठ ने आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं को संबंधित हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि कुत्तों की अंधाधुंध हत्या किसी भी परिस्थिति में नहीं हो सकती और अधिकारियों को कानून और संवेदना के अनुसार ही कार्रवाई करनी होगी।
मामला तब चर्चा में आया जब 11 अगस्त को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से सभी लावारिस कुत्तों को हटाने का आदेश दिया। इसके बाद देशभर में पशु प्रेमियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी, मेनका गांधी, जॉन अब्राहम और वरुण धवन जैसे कई लोगों ने इस फैसले का विरोध किया। अदालत ने आठ हफ्तों के भीतर सभी आवारा कुत्तों को नगर निगम अथॉरिटी द्वारा बनाए गए शेल्टर में रखने और इलाकों को कुत्तों से मुक्त करने का निर्देश दिया था, साथ ही कहा था कि इस पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।






