डायबिटीज से जुड़े 3 बड़े भ्रम, जिन पर अधिकतर लोग करते हैं यकीन

डायबिटीज को लेकर आज भी लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियां मौजूद हैं। हार्वर्ड-प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, आइए जानते हैं डायबिटीज से जुड़े 3 बड़े भ्रम और उनके पीछे की सच्चाई।

अगर आपको डायबिटीज है या आपके किसी करीबी को यह रोग है, तो आपने भी ज़रूर कुछ आम लेकिन गलत बातें सुनी होंगी। ये बातें परिवार के व्हाट्सऐप ग्रुप से लेकर पुराने पड़ोसियों और अच्छे दोस्तों तक में चर्चा का हिस्सा होती हैं, और कई बार लोग इन्हें सच मान लेते हैं। हकीकत यह है कि डायबिटीज के बारे में फैली बहुत-सी बातें अधूरी या पूरी तरह गलत होती हैं। सही जानकारी होना बेहद ज़रूरी है।

भ्रम 1: डायबिटीज सिर्फ बुजुर्गों को होती है
सच: डायबिटीज किसी भी उम्र में हो सकती है। टाइप 1 डायबिटीज अक्सर बच्चों और युवाओं में दिखाई देती है, जबकि टाइप 2 आमतौर पर बड़ों में पाई जाती है। हालांकि, बदलती जीवनशैली के कारण आजकल बच्चे और किशोर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं, खासकर तब जब वजन अधिक हो या परिवार में पहले से इसका इतिहास हो।

भ्रम 2: लक्षण नहीं हैं, मतलब बीमारी गंभीर नहीं है
सच: भले ही आप ठीक महसूस करें, आपका ब्लड शुगर स्तर खतरनाक रूप से ऊंचा हो सकता है। डायबिटीज को “साइलेंट डिज़ीज़” भी कहा जाता है क्योंकि यह कई सालों तक बिना लक्षण दिखाए शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर दिल, किडनी, आंखों और नसों को। इसलिए सिर्फ महसूस करने पर नहीं, बल्कि ब्लड टेस्ट, डॉक्टर की जांच और नियमित शुगर मॉनिटरिंग से ही सही स्थिति का पता चलता है।

भ्रम 3: शुगर नॉर्मल होते ही दवा बंद कर सकते हैं
सच: यह सबसे खतरनाक गलतफहमियों में से एक है। डायबिटीज पूरी तरह ठीक नहीं होती। भले ही ब्लड शुगर सामान्य हो, दवा, डाइट और व्यायाम जारी रखना ज़रूरी है, जब तक डॉक्टर खुद रोकने की सलाह न दें। अपनी मर्ज़ी से दवा बंद करने पर शुगर तेजी से बढ़ सकती है और गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।

ये गलतफहमियां कहां से आती हैं?
अधिकतर मिथक पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आते हैं या सोशल मीडिया पर फैलते हैं। इंटरनेट के युग में भी गैर-विशेषज्ञ लोग इन्हें आगे बढ़ाते रहते हैं, जिससे सच और झूठ में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए हमेशा सही जानकारी के लिए डॉक्टर या प्रमाणित स्वास्थ्य संस्थानों पर भरोसा करें।

विशिखा मीडिया

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