डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचानना और नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है। लेकिन सवाल ये है कि ग्लूकोमीटर या HbA1c टेस्ट, इनमें से कौन-सा ज्यादा असरदार है?

डायबिटीज आज हर उम्र के लोगों के लिए खतरा बन चुकी है। अकेले भारत में ही करोड़ों लोग इस बीमारी की चपेट में हैं और हर साल इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि भारत को “डायबिटीज कैपिटल” भी कहा जाता है। भागदौड़ भरी जिंदगी, फास्ट फूड, नींद की कमी और तनाव जैसी आदतें इस बीमारी को और गंभीर बना रही हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि डायबिटीज धीरे-धीरे शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाती है और लंबे समय में दिल, किडनी, आंखों और नसों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है।
हाल में हुई एक रिसर्च बताती है कि समय-समय पर जांच कराने से डायबिटीज का खतरा लगभग 31% तक कम किया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर टेस्ट और इलाज से इस बीमारी को कंट्रोल करना आसान होता है और शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान से बचाया जा सकता है।
शुगर लेवल की निगरानी क्यों जरूरी?
शुगर की जांच के लिए सबसे आम तरीका ग्लूकोमीटर है। यह छोटा-सा डिवाइस घर पर ही खून की एक बूंद लेकर शुगर लेवल बताता है। कुछ ही सेकंड में यह पता चल जाता है कि फिलहाल आपका शुगर स्तर कितना है। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह खासतौर पर उपयोगी है, क्योंकि उन्हें दिन में कई बार जांच करनी पड़ती है। इससे वे समझ पाते हैं कि कौन-सा खाना या दवा उनके शुगर लेवल को किस तरह प्रभावित कर रही है।
HbA1c टेस्ट क्या बताता है?
HbA1c या ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट एक ब्लड टेस्ट है जो पिछले 2-3 महीनों का औसत शुगर लेवल दिखाता है। खून में लंबे समय तक शुगर बनी रहने पर वह हीमोग्लोबिन से चिपक जाती है और इससे HbA1c की रीडिंग बढ़ जाती है। यही वजह है कि यह टेस्ट एक दिन की बजाय पूरे 90 दिनों की स्थिति बताता है। डॉक्टर डायबिटीज की सही पहचान और उसकी गंभीरता समझने के लिए इसे सबसे विश्वसनीय मानते हैं।
• सामान्य स्तर: 5.7% से कम
• 5.7% से 6.4%: प्री-डायबिटीज
• 6.5% या उससे अधिक: डायबिटीज
आखिर कौन-सा टेस्ट बेहतर है?
विशेषज्ञों के अनुसार दोनों ही टेस्ट जरूरी हैं, लेकिन इनके उद्देश्य अलग-अलग हैं।
• ग्लूकोमीटर: रोजाना शुगर की स्थिति बताने में मदद करता है और मरीज को तुरंत नियंत्रण का मौका देता है।
• HbA1c: पिछले तीन महीनों का औसत बताकर बीमारी की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि डायबिटीज के मरीजों को रोजाना ग्लूकोमीटर से जांच करनी चाहिए और हर तीन महीने में HbA1c टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
नोट: संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।





