देश में पढ़े-लिखे बेरोजगारों की स्थिति इतनी गंभीर है कि राजस्थान में दसवीं पास योग्यता वाले चपरासी के पद के लिए लगभग 85% ग्रेजुएट और उससे ऊपर की डिग्री वाले उम्मीदवारों ने आवेदन किया। इस पद के लिए बी.टेक, एम.एससी और पीएचडी धारक भी शामिल हुए। लोगों का कहना है कि बड़ी नौकरियों की वैकेंसी नहीं मिल रही है। और अगर वैकेंसी आती भी है, तो पेपर लीक की वजह से चयन प्रक्रिया प्रभावित होती है। राजस्थान में चतुर्थ श्रेणी के 53,000 पदों के लिए लगभग 25 लाख लोगों ने आवेदन किया था। इनमें से करीब 90% उम्मीदवार अपनी योग्यता से इस पद के लिए अधिक योग्य (ओवर क्वालिफाईड) हैं। कई पढ़े-लिखे युवा, जो अच्छी नौकरी न मिलने के कारण अब दफ्तरों में स्टूल पर बैठने वाली नौकरी के लिए चपरासी बनना चाहते हैं। इन पदों के लिए परीक्षा 19, 20 और 21 सितंबर को आयोजित की गई। परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए बसों में इतनी भीड़ थी कि मारा-मारी जैसी स्थिति बन गई।
परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की भीड़ इतनी थी कि परीक्षा केंद्र से बाहर निकलकर बस स्टैंड पर सीट पाने के लिए लोग जद्दोजहद में लग गए। जयपुर परीक्षा देने आए उम्मीदवार नरेंद्र बिजाणियां ने बताया कि वह गणित में एम.एससी और बीएड हैं और पिछले पांच सालों से पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं। उम्र बढ़ने के कारण अब वे चपरासी बनने के लिए भी तैयार हैं। ज्यादातर एम.एससी और बीटेक उम्मीदवार अपना नाम नहीं बताना चाहते थे। उनका कहना था कि गांव वाले और रिश्तेदार उन्हें पढ़ा-लिखा समझते हैं, लेकिन अगर पता चल गया कि वे चपरासी बनने आए हैं तो हँसेंगे। ऐसे पढ़े-लिखे युवा अब उसी स्कूल में घंटी बजाने और पानी पिलाने के लिए तैयार हैं, जहां वे कभी टीचर बनना चाहते थे।
8 साल बाद हो रही है चतुर्थ श्रेणी की भर्ती
राजस्थान में आठ साल बाद चतुर्थ श्रेणी के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई। 53,749 पदों पर भर्ती के लिए 24,75,000 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इसमें केवल 10% उम्मीदवार दसवीं पास हैं, जबकि 90% ओवर-क्वालिफाईड हैं। राज्य के 38 जिलों में 1,286 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें हर पारी में 4,11,843 अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं। परीक्षा 19, 20 और 21 सितंबर तक आयोजित होगी।






