
इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन (ISF) की रिपोर्ट के अनुसार 2027 तक 2.5 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है राजस्व
देश में फ्लैक्सी स्टाफिंग यानी कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी कर्मचारियों की मांग लगातार तेज़ी से बढ़ रही है। इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन (ISF) की रिपोर्ट के अनुसार, यह सेक्टर वित्त वर्ष 2027 तक लगभग ₹2.58 लाख करोड़ का हो सकता है। इसमें हर साल करीब 17.3% की दर से वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट बताती है कि 2027 तक भारत में फ्लैक्सी वर्कर्स की संख्या 91.6 लाख तक पहुंच सकती है, यानी यह सेक्टर 12.6% की सालाना दर से बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट का शीर्षक है, “इंडियन फ्लैक्सी स्टाफिंग इंडस्ट्री 2025: एम्प्लॉयमेंट ग्रोथ सेक्टर एंड स्टेट एनालिसिस”
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा फ्लैक्सी जॉब्स?
लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग-फाइनेंशियल सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे अधिक फ्लैक्सी कर्मचारियों को काम पर रख रहे हैं। इन तीनों में करीब 38% कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ कार्यरत है। ई-कॉमर्स में भी पिछले पाँच सालों में फ्लैक्सी हायरिंग में 20% सालाना की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा फिनटेक, आईटी, रिटेल, एजुकेशन और हेल्थकेयर जैसे 12 सेक्टर मिलकर कुल 80% फ्लैक्सी वर्कफोर्स को रोजगार उपलब्ध कराते हैं।
कौन से राज्य और शहर आगे?
फ्लैक्सी वर्कफोर्स में महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 55% है। वहीं, कोयंबटूर, मैसूर, इंदौर, भोपाल और सूरत जैसे टियर-2 व टियर-3 शहर तेजी से नए हायरिंग हब बनकर उभर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 71% फ्लैक्सी वर्कर्स 30 वर्ष से कम आयु के हैं। यानी युवा वर्ग इस मॉडल को बड़ी संख्या में अपना रहा है। महिलाओं की भागीदारी भी बढ़कर 26% तक पहुंच गई है, जो सकारात्मक संकेत है।
आईएसएफ का कहना है कि अब छोटे शहरों में भी फ्लैक्सी नौकरियों के तहत कर्मचारियों को मान्यता प्राप्त रोजगार, वेतन, बोनस और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे लाभ मिलने लगे हैं। इससे देश में औपचारिक रोजगार को मजबूती मिल रही है। कंपनियां लागत कम करने और स्किल्ड टैलेंट तक जल्दी पहुंचने के लिए फ्लैक्सी स्टाफिंग मॉडल अपना रही हैं। यह मॉडल न सिर्फ नए रोजगार पैदा कर रहा है, बल्कि देश की आर्थिक संरचना को भी नया रूप दे रहा है।




