राहुल गांधी का जेन-जेड दांव, लोकतंत्र की रक्षा या पड़ोसी देशों जैसी आग का न्योता

देश की सियासत में इन दिनों हंगामा बरपा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक ट्वीट ऐसा है, जिसने सबको चौंका दिया। 18 सितंबर 2025 को एक्स पर उन्होंने लिखा, ‘देश के युवा, देश के छात्र, देश की जेनरेशन-जी संविधान को बचाएंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट की चोरी रोकेगी। मैं उनके साथ हमेशा खड़ा हूं। जय हिंद!’ यह कोई मामूली बात नहीं थी। इस ट्वीट में पड़ोसी मुल्क नेपाल के हाल के जेन-जी आंदोलन की छाया साफ दिख रही है, जहां नौजवानों ने सड़कों पर उतरकर सरकार को उखाड़ फेंका। सवाल उठ रहे हैं, क्या राहुल गांधी युवाओं को सड़कों पर बुलाने का इशारा दे रहे हैं? क्या वे चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का इल्जाम लगाकर आग भड़का रहे हैं? कांग्रेस का कहना है कि युवा उनकी ताकत हैं, वहीं भाजपा इसे ‘नेपाल जैसी साजिश’ बता रही है। ऊपर से सैम पित्रोदा का पाकिस्तान को ‘घर जैसा’ बताने वाला बयान ने नया बवाल खड़ा कर दिया। आखिर क्या है यह माजरा? क्या राहुल का जेन-जी दांव भारत में नेपाल जैसी आग लगाएगा या लोकतंत्र को और मजबूत करेगा?
नेपाल में सितंबर महीने में जेन-जी आंदोलन ने तहलका मचा दिया। वहां की सरकार को जाना पड़ा। बात शुरू हुई 4 सितंबर से, जब नेपाल सरकार ने फेसबुक, एक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया पर पाबंदी लगा दी। वजह बताई गई कि ये कंपनियां नए नियमों में रजिस्टर नहीं हुई थीं। लेकिन यह फैसला 1995 से 2010 के बीच पैदा हुए जेन-जी युवाओं को बिल्कुल रास नहीं आया। उनके लिए सोशल मीडिया सिर्फ टाइमपास नहीं, बल्कि रोजगार, पढ़ाई और दुनिया से जुड़ने का जरिया है। रील्स बनाकर पैसे कमाने वाले, विदेश में बसे रिश्तेदारों से वीडियो कॉल करने वाले, ऑनलाइन बिजनेस चलाने वाले सब गुस्से में आ गए। शुरू में आंदोलन बैन के खिलाफ था, लेकिन जल्दी ही यह भ्रष्टाचार, परिवारवाद और अमीर-गरीब की खाई के खिलाफ उग्र हो गया। काठमांडू से लेकर छोटे शहर तक सड़कों पर हजारों युवा उतर आए। सरकारी दफ्तरों, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास पर हमले हुए। कम से कम 51 लोग मारे गए, सैकड़ों लोग जख्मी हुए। सेना को सड़कों पर उतारना पड़ा। एक बड़े नेता ने कहा, ‘सियासी दलों ने युवाओं की बात नहीं सुनी, इसलिए हिंसा भड़की।’ नतीजा? प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को कुर्सी छोड़नी पड़ी। अब नई सरकार की बात हो रही है, जिसमें कुछ नए चेहरों के नाम सामने आ रहे हैं। यह आंदोलन कुछ नौजवानों ने शुरू किया, जो सियासत से दूर थे। बाद में विपक्षी दलों ने इसे हवा दी। भारत पर भी इसका असर पड़ा। उत्तराखंड के सीमाई बाजारों में धंधा ठप है, क्योंकि नेपाली ग्राहक सड़कों पर हैं। नेपाल का यह बवाल भारत के लिए चेतावनी बन रहा है।
राहुल गांधी का ट्वीट इस माहौल में आया। उन्होंने नेपाल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी बातों में वही जोश दिखा। बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के बाद उनका ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ वाला नारा वायरल हो गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चुनाव आयोग पर सीधा निशाना साधा। कर्नाटक में 6018 वोटरों के नाम कटने और महाराष्ट्र में 6180 वोटर जोड़े जाने का हवाला देकर ‘वोट चोरी फैक्ट्री’ का इल्जाम लगाया। मुख्य चुनाव आयुक्त को ‘वोट चोरों का सरगना’ तक कह डाला। आयोग ने सफाई दी कि यह रूटीन काम है, लेकिन राहुल नहीं रुके। उन्होंने कहा, ‘मैं 100 फीसदी सबूतों के साथ बोल रहा हूं। मुझे अपने देश और संविधान से प्यार है। ‘कांग्रेस का कहना है कि युवा उनकी ताकत हैं। भारत जोड़ो न्याय यात्रा में राहुल ने ‘युवा न्याय’ की बात की थी। गुजरात दौरे पर फिटनेस पर जोर दिया, जो युवा नजरिए को दिखाता है। लेकिन भाजपा इसे खतरनाक खेल बता रही। सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स पर तंज कसा, ‘जेन-जी परिवारवाद के खिलाफ है। वह नेहरू, इंदिरा, राजीव, सोनिया के बाद राहुल को क्यों बर्दाश्त करेगा? भ्रष्टाचार से नफरत करता है, तो यूपीए के घोटाले कैसे भूलेगा?’ उनका पोस्ट वायरल हो गया। दुबे ने गृह मंत्रालय और ईडी से सैम पित्रोदा की फंडिंग और राहुल के विदेश दौरों की जांच की मांग की। बोले, ‘कांग्रेस विदेशी ताकतों के साथ अराजकता फैलाना चाहती है। देश छोड़ने की तैयारी करो।’ कंगना रनौत ने कहा, ‘नेपाल में जेन-जी ने परिवारवादी सरकार उखाड़ी। राहुल देश को शर्मिंदा करते हैं।’ भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी बोले, ‘कांग्रेस की पहचान परिवारवाद और घोटाले हैं।’ पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने तो हद कर दी, बोले, ‘नेपाल जैसी क्रांति भारत में हुई तो राहुल-अखिलेश के घरों में आग लग जाएगी!’
विपक्ष में शिवसेना के संजय राउत ने राहुल का साथ दिया, लेकिन चेताया, ‘भारत में भी ऐसा हो सकता है, भाजपा तैयार रहे।’ जेडीयू के नीरज कुमार ने जवाब दिया, ‘भारत न बांग्लादेश है, न नेपाल। यहां लोकतंत्र मजबूत है।’ गृह मंत्री अमित शाह बोले, ‘चुनाव आयोग को बदनाम करना कांग्रेस की पुरानी चाल।’ अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘कांग्रेस लोकतंत्र कमजोर कर रही।’ प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के नेताओं से बात की और युवाओं को शांतिपूर्ण रास्ता अपनाने की सलाह दी। इस बवाल में सैम पित्रोदा ने आग में और घी डाला। 19 सितंबर को उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान गया, वहां घर जैसा लगा। बांग्लादेश, नेपाल में भी ऐसा ही।’ भाजपा ने इसे ‘देशद्रोही’ बताया। शहजाद पूनावाला ने एक्स पर लिखा, ‘पित्रोदा को पाकिस्तान घर जैसा लगता है? 26/11 पर नरमी, पुलवामा में पाक का साथ कांग्रेस की सोच साफ!’ पित्रोदा ने राहुल के जेन-जी बयान का समर्थन किया, लेकिन उनके पुराने बयान याद आ गए 1984 दंगों पर ‘हुआ तो हुआ’, उत्तर-पूर्व को ‘चीनी-अफ्रीकी’ कहना, विरासत टैक्स की बात। कांग्रेस ने खुद को अलग किया, लेकिन नुकसान हो चुका। 19 सितंबर को दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (डूसू) चुनाव में नौजवानों ने जवाब दे दिया। एबीवीपी ने जीत हासिल की, आर्यन मान अध्यक्ष बने। #ABVP4DUSU ट्रेंड किया। पंजाब यूनिवर्सिटी में भी एबीवीपी जीती। लोग बोले, ‘राहुल के बयान के अगले दिन जेन-जी ने भाजपा चुनी।’
बिहार चुनाव से पहले यह बवाल बड़ा है। कांग्रेस कहती है, जेन-जी पढ़ाई, नौकरी, बराबरी चाहती है। राहुल बार-बार कहते हैं, लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं। उनकी बात अच्छी लगती है, लेकिन सवाल है क्या वे वोटिंग की बात कर रहे या सड़कों पर बवाल का इशारा दे रहे हैं? एक्स पर #VoteChoriFactory ट्रेंड कर रहा, लेकिन मुंबई में आईफ़ोन 17 की लाइन में जेन-जी रात 2 बजे से खड़ी है। एक यूजर ने तंज मारा, ‘राहुल की बात सुनी, जागे, मगर आईफ़ोन लेने चले गए।’ कांग्रेस के जमाने में सिलेंडर की लाइन थी, आज ऐपल फोन की। केंद्र की स्किल इंडिया, विकसित भारत रोजगार योजना युवा-केंद्रित हैं। मोदी ने 2014 में गूगल हैंगआउट पर युवाओं से बात की थी। राहुल का बयान कांग्रेस के लिए दोधारी तलवार है। वे संविधान बचाने की बात करते हैं, लेकिन नेपाल का जिक्र सड़क आंदोलन का संकेत देता है। भारत का लोकतंत्र वोट से चलता है, आग से नहीं। श्रीलंका की तबाही, बांग्लादेश का बवाल, नेपाल का दर्द क्या राहुल भारत को उसी रास्ते ले जाना चाहते हैं? या जागरूकता फैला रहे? पित्रोदा का बयान दिखाता है, कांग्रेस पड़ोसियों से नरम, भारत से सख्त। लेकिन डुसू ने साफ कर दिया जेन-जी तरक्की चाहती है, बवाल नहीं। राहुल जी, नौजवानों को वोट की ताकत सिखाइए। आपके परिवार ने इसी सिस्टम से सत्ता पाई। बिहार चुनाव बताएंगे, जेन-जी राहुल के साथ है या तरक्की के रास्ते पर। लोकतंत्र बचेगा, अगर युवा वोट से बदलाव लाएं। आग से नहीं।

अजय कुमार,
वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ

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