अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। उन्होंने एक आदेश जारी करते हुए कहा कि जिन आवेदनों के साथ एक लाख डॉलर का भुगतान नहीं होगा, उन विदेशी कामगारों को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्णय विशेष रूप से भारत जैसे देशों के आईटी पेशेवरों और कंपनियों को प्रभावित करेगा।
शुक्रवार को ट्रंप ने “कुछ गैर-आप्रवासी कामगारों के प्रवेश पर प्रतिबंध” शीर्षक वाले घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसमें कहा गया कि जिन एच-1बी वीजा आवेदनों के साथ निर्धारित राशि जमा नहीं की गई है, उन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह वीजा कार्यक्रम मूल रूप से अमेरिका में अस्थायी रूप से काम करने वाले उच्च कुशल लोगों के लिए बनाया गया था, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल कर अमेरिकी श्रमिकों को हटाकर कम वेतन पर विदेशी कामगारों को नियुक्त किया गया।
ट्रंप ने कहा कि एच-1बी वीजा का यह दुरुपयोग न केवल अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है। अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच में पाया गया कि कई आउटसोर्सिंग कंपनियां, जो एच-1बी वीजा पर निर्भर हैं, वीजा धोखाधड़ी, धनशोधन और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रही हैं। राष्ट्रपति ने जोर दिया कि कंपनियों पर भारी शुल्क लगाने का मकसद उन्हें केवल सबसे कुशल और योग्य कामगारों को नियुक्त करने के लिए बाध्य करना है। घोषणापत्र में यह भी कहा गया कि इस वीजा के व्यापक दुरुपयोग ने अमेरिका की आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
नए आदेश के अनुसार, गृह सुरक्षा विभाग ऐसे किसी भी एच-1बी वीजा आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा, जिसके साथ एक लाख डॉलर का भुगतान न हो और जो कार्य अमेरिका के बाहर के हों। यह आदेश 21 सितंबर से लागू होकर अगले 12 महीनों तक प्रभावी रहेगा।
एच-1बी वीजा कार्यक्रम का दुरुपयोग, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा- ट्रंप






