एच-1बी वीजा: अमेरिका की नई वीजा नीति से कई भारतीय कंपनियों पर असर

ट्रंप प्रशासन के नए आदेश के तहत एच-1बी वीजा पर अब एक लाख डॉलर का भारी शुल्क लगाया गया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीय आईटी कंपनियों टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और टेक महिंद्रा पर पड़ेगा, क्योंकि ये कंपनियां एच-1बी वीजा पर सबसे अधिक निर्भर हैं। उदाहरण के तौर पर, साल 2025 में टीसीएस को 5,505 वीजा मिले, जबकि अमेजन को 10,044 वीजा दिए गए। यह स्पष्ट करता है कि यह कदम भारतीय आईटी सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संबंध में कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अब एच-1बी वीजा पर अमेरिका जाने वाले हर पेशेवर को अतिरिक्त एक लाख डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) का शुल्क देना होगा। यह नियम अगले 12 महीनों तक लागू रहेगा।

भारतीय कंपनियां होंगी सबसे ज्यादा प्रभावित
नए आदेश का सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि इन कंपनियों ने हजारों एच-1बी वीजा प्राप्त किए, लेकिन इसी दौरान उन्होंने बड़े पैमाने पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी भी की। उदाहरण के लिए, एक कंपनी को 2025 में 5,000 से ज्यादा वीजा मिले, मगर उसी अवधि में उसने 15,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। इसी तरह, दूसरी कंपनी को 1,700 वीजा मिले लेकिन उसने 2,400 कर्मचारियों की छंटनी कर दी। एक और कंपनी ने 2022 से अब तक 27,000 अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया, जबकि उसे 25,000 से अधिक एच-1बी वीजा जारी किए गए।

किन कंपनियों को मिले सबसे ज्यादा एच-1बी वीजा?
यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के मुताबिक, साल 2025 में अमेजन को सबसे ज्यादा यानी 10,044 एच-1बी वीजा मिले। इसके बाद टीसीएस को 5,505, माइक्रोसॉफ्ट को 5,189, मेटा को 5,123, एप्पल को 4,202, गूगल को 4,181, डेलॉयट को 2,353, इन्फोसिस को 2,004, विप्रो को 1,523 और टेक महिंद्रा अमेरिका को 951 वीजा जारी किए गए। ट्रंप के इस आदेश के बाद भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका जाना और भी महंगा हो जाएगा। भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिकी बाजार में भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी। वहीं, अमेरिका में नौकरी की तलाश कर रहे स्थानीय लोगों को इस फैसले से कुछ राहत मिल सकती है।

ट्रंप प्रशासन का तर्क
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि एच-1बी वीजा का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। जारी आदेश में बताया गया है कि 2000 से 2019 के बीच अमेरिका में विदेशी STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) वर्कर्स की संख्या 1.2 मिलियन से बढ़कर 2.5 मिलियन हो गई है। कंप्यूटर और गणित से जुड़ी नौकरियों में विदेशी कर्मचारियों की हिस्सेदारी 17.7% से बढ़कर 26.1% तक पहुंच गई है। प्रशासन का आरोप है कि आईटी कंपनियां सस्ते विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रही हैं। यह आदेश फिलहाल एक साल के लिए लागू रहेगा, लेकिन प्रशासन ने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

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