
अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा जताए जाने से पूरे पश्चिमी जगत में तनाव की स्थिति बन गई है। हालांकि जिन कारणों के चलते अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चाहता है, अब उन्हीं कारणों को लेकर ब्रिटेन ने भी समर्थन के संकेत दिए हैं।
ब्रिटेन ने आर्कटिक महासागर में रूस-चीन के बढ़ते गठजोड़ को गंभीर खतरा बताया है और इस मुद्दे पर नाटो देशों से बातचीत शुरू कर दी है। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की कोशिशें अब एक नए और दिलचस्प मोड़ पर पहुंचती दिख रही हैं, क्योंकि इसमें ब्रिटेन की भी एंट्री हो गई है। ब्रिटेन सरकार अपने नाटो सहयोगी देशों के साथ आर्कटिक महासागर की सुरक्षा को लेकर विचार-विमर्श कर रही है। रूस और चीन लगातार इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं, जिस पर ब्रिटेन ने गहरी चिंता जताई है। इन्हीं दोनों देशों की चुनौती से निपटने के लिए ब्रिटेन नाटो देशों को एकजुट करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर पर्दे के पीछे क्या रणनीति बन रही है और इसके क्या प्रभाव हो सकते हैं।
नाटो देशों के साथ ब्रिटेन की बातचीत
ब्रिटेन की परिवहन मंत्री हैदी एलेक्जेंडर ने जानकारी दी कि ब्रिटिश सरकार नाटो के सहयोगी देशों के साथ आर्कटिक सागर के मुद्दे पर चर्चा कर रही है। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की इच्छा जाहिर की है। इसको लेकर नाटो सहयोगियों में नाराजगी देखी जा रही है और कुछ देशों ने आशंका जताई है कि अमेरिका के इस कदम से नाटो गठबंधन कमजोर पड़ सकता है। ऐसे में ब्रिटेन की यह पहल माहौल को संतुलित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि इन बैठकों में क्या चर्चा हुई, लेकिन माना जा रहा है कि ब्रिटेन का उद्देश्य नाटो को टूटने से बचाना और आर्कटिक क्षेत्र में रूस-चीन की बढ़ती साझेदारी का सामना करना है।
आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन लगातार अपनी सैन्य और रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। दोनों देश यहां संयुक्त रूप से निगरानी और सहयोग कर रहे हैं, जिससे कई आर्कटिक देशों की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। रूस-चीन की इस बढ़ती गतिविधि को पश्चिमी देशों के साथ-साथ अमेरिका की सुरक्षा के लिए भी खतरे के रूप में देखा जा रहा है। इसी वजह से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चाहते हैं, ताकि वहां मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किया जा सके और रूस-चीन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
ब्रिटेन भी इस खतरे को लेकर सतर्क है और माना जा रहा है कि वह पर्दे के पीछे अमेरिका के ग्रीनलैंड संबंधी रुख का समर्थन कर सकता है। हालांकि सार्वजनिक रूप से ब्रिटेन ने एक ऐसा प्रस्ताव सामने रखा है, जिस पर सभी पक्ष सहमत हो सकते हैं और अमेरिका व नाटो देशों के बीच ग्रीनलैंड को लेकर चल रही तनातनी भी खत्म हो सकती है। ब्रिटेन ने ग्रीनलैंड में संयुक्त सैन्य अड्डे स्थापित करने का सुझाव दिया है, जहां डेनमार्क के साथ-साथ ब्रिटेन और नाटो देशों के सैनिक तैनात होंगे। अमेरिका को भी इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया जा सकता है। यदि अमेरिका इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच चल रहा विवाद सुलझ सकता है। ब्रिटेन ने चेतावनी भी दी है कि यदि अमेरिका जबरन ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करता है और इससे नाटो गठबंधन कमजोर होता है, तो इसका सीधा लाभ रूस और चीन को मिलेगा।






