राष्ट्रीय युवा दिवस आज : मोटापा ही नहीं दुबलापन भी युवाओं को कर रहा है बेचैन

एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, मोटापे से पीड़ित 49 प्रतिशत और कम वजन वाले 47 प्रतिशत युवा मध्यम से गंभीर स्तर की बॉडी इमेज से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
देश के युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित एक गंभीर चुनौती उभरकर सामने आई है। अब तनाव और आत्मविश्वास की कमी केवल मोटापे से जूझ रहे युवाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि दुबले-पतले दिखने वाले युवा भी अपने शरीर को लेकर असंतोष और असहजता महसूस कर रहे हैं। शरीर की बनावट को लेकर लगातार तुलना, सामाजिक ताने और अपेक्षाएं युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं। जर्नल ऑफ एजुकेशन एंड हेल्थ प्रमोशन में प्रकाशित इस शोध में इस स्थिति को “बॉडी इमेज डिस्ट्रेस” बताया गया है, जो धीरे-धीरे युवाओं के आत्मविश्वास को कमजोर कर रही है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययन में इस समस्या को आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया गया है। इस शोध में एम्स की ओपीडी से जुड़े 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 1,071 युवाओं को शामिल किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, मोटापे से ग्रस्त 49 प्रतिशत और कम वजन वाले 47 प्रतिशत युवा मध्यम से गंभीर स्तर की बॉडी इमेज समस्या से गुजर रहे हैं। वहीं, सामान्य या थोड़ा अधिक वजन वाले युवाओं में यह समस्या अपेक्षाकृत कम, लगभग 36 प्रतिशत पाई गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह चुनौती केवल मोटापे तक सीमित नहीं है। हर तीसरा युवा खुद को आत्मविश्वास की कमी से जूझता हुआ मानता है, जबकि हर चौथा युवा यह महसूस करता है कि उसके शरीर के आधार पर उसे आंका जाता है।

मोटे युवाओं में आत्म-संकोच, दुबले युवाओं में अकेलेपन की भावना
शोध से जुड़ी विशेषज्ञ न्यूट्रिशनिस्ट वारिशा अनवर के अनुसार, लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि शरीर को लेकर असंतोष केवल मोटे लोगों में होता है, लेकिन यह धारणा सही नहीं है। दुबले-पतले युवाओं में भी शर्म, चिंता और आत्म-असुरक्षा की भावना उतनी ही गहरी पाई गई है। कई युवा लगातार इस सोच में रहते हैं कि लोग उन्हें उनके शरीर के आधार पर आंक रहे हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि वजन के अनुसार मानसिक परेशानी का स्वरूप अलग-अलग होता है। मोटापे से जूझ रहे युवाओं में आत्म-संकोच और आत्मविश्वास की कमी अधिक देखने को मिली, जबकि कम वजन वाले युवाओं में अकेलापन, चिंता और सामाजिक दूरी की भावना ज्यादा पाई गई।

विशिखा मीडिया

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