
एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में देश के पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किया गया है। कभी जिन पर देश की समुद्री सुरक्षा की सर्वोच्च जिम्मेदारी थी, अब उन्हें अपनी भारतीय नागरिकता से जुड़ा प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
चुनाव आयोग ने सेवानिवृत्त एडमिरल अरुण प्रकाश को नोटिस जारी कर एसआईआर के तहत चल रही प्रक्रिया में अपनी पहचान सत्यापित करने के लिए बैठक में उपस्थित होने को कहा है। सेवानिवृत्ति के बाद गोवा में रह रहे एडमिरल प्रकाश का कहना है कि यदि एसआईआर फॉर्म से आवश्यक जानकारी प्राप्त नहीं हो पा रही है, तो उसमें संशोधन किया जाना चाहिए। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 2002 में अपडेट की गई मतदाता सूची में एडमिरल अरुण प्रकाश का नाम शामिल नहीं है और वे ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में आते हैं। इस संबंध में एडमिरल प्रकाश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वे चुनाव आयोग को कुछ सुझाव देना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “पहला, यदि एसआईआर फॉर्म से जरूरी जानकारी नहीं मिल रही है, तो उसमें बदलाव किया जाना चाहिए। दूसरा, बीएलओ तीन बार हमारे घर आए, उस समय वे हमसे अतिरिक्त जानकारी ले सकते थे। तीसरा, हम 82 और 78 वर्ष के बुजुर्ग दंपती हैं, इसके बावजूद हमें 18 किलोमीटर दूर दो अलग-अलग तारीखों पर बुलाया गया है।” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने एसआईआर फॉर्म पहले ही भर दिए थे।
2004 से 2006 तक संभाली नौसेना की कमान
एडमिरल अरुण प्रकाश भारतीय नौसेना के सर्वोच्च पद पर सेवाएं दे चुके हैं। वे 31 जुलाई 2004 से 30 अक्टूबर 2006 तक नौसेना प्रमुख रहे। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने एक कैरियर-बोर्न फाइटर स्क्वाड्रन, एक नेवल एयर स्टेशन और चार युद्धपोतों की कमान संभाली, जिनमें विमानवाहक पोत आईएनएस विराट भी शामिल है। उनकी विशिष्ट सेवाओं और वीरता के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, वीर चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है।






