अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीय नागरिकों को लेकर अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा अमेरिकी विमान

विमान में कुल 104 निर्वासित भारतीय सवार थे, जिनमें पंजाब से 30, हरियाणा और गुजरात से 33-33 लोग शामिल थे। इसके अलावा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ के भी कुछ लोग इस सूची में थे।

अवैध भारतीय प्रवासियों को लेकर एक अमेरिकी सैन्य विमान बुधवार दोपहर श्री गुरु रामदास जी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा। जानकारी के अनुसार, इस विमान में कुल 104 निर्वासित भारतीय थे और यह दोपहर लगभग 1:55 बजे लैंड हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें पंजाब से 30, हरियाणा और गुजरात से 33-33, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से तीन-तीन तथा चंडीगढ़ से दो लोग थे। निर्वासित भारतीयों में 18 वर्ष से कम उम्र के 12 बच्चे और लगभग 24 महिलाएं भी शामिल थीं। अब तक डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने ग्वाटेमाला, पेरू और होंडुरास के अवैध प्रवासियों को सैन्य विमानों से उनके देशों में वापस भेजा है।
बुधवार को अमेरिकी वायु सेना का विमान कथित रूप से अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे भारतीय नागरिकों को लेकर पंजाब के अमृतसर पहुंचा। अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने बताया कि हालांकि पूरी जानकारी साझा नहीं की जा सकती, लेकिन यह स्पष्ट है कि अमेरिका अपने सीमा और आव्रजन कानूनों को सख्ती से लागू कर रहा है। प्रवक्ता ने कहा, “अब तक की गई कार्रवाइयों से यह साफ संदेश जाता है कि अवैध प्रवासियों के लिए हमारे देश में कोई जगह नहीं है।” सीबीएस न्यूज़ के अनुसार, अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) कुछ प्रवासी बंदियों को रिहा कर रहा है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन के दौरान गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ने से हिरासत केंद्र अपनी अधिकतम क्षमता पार कर चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी जेलों में करीब 42,000 प्रवासी बंदी हैं।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “अमेरिका से भारतीयों को हथकड़ी लगाकर और अपमानित करके निर्वासित किए जाने की तस्वीरें देखकर, एक भारतीय होने के नाते मुझे दुख होता है।” उन्होंने दिसंबर 2013 की उस घटना को याद किया जब भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े को अमेरिका में हथकड़ी लगाई गई थी और स्ट्रिप सर्च (कपड़े उतरवाकर तलाशी) की गई थी।
खेड़ा ने कहा कि तब यूपीए सरकार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। मीरा कुमार, सुशील कुमार शिंदे और राहुल गांधी जैसे नेताओं ने भारत दौरे पर आए अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया था। डॉ. मनमोहन सिंह ने इस घटना को “निंदनीय” बताया था, और भारत सरकार ने अमेरिकी दूतावास को दी जाने वाली कई सुविधाएं वापस ले ली थीं, जिनमें राजनयिकों के लिए खाद्य पदार्थों और शराब के रियायती आयात की अनुमति भी शामिल थी।
विदेश मंत्रालय का बयान
24 जनवरी को विदेश मंत्रालय ने कहा था कि संयुक्त राज्य अमेरिका या दुनिया के किसी भी हिस्से में बिना उचित दस्तावेजों के रहने वाले भारतीय नागरिकों की वापसी की सुविधा प्रदान की जाएगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम अवैध अप्रवास का समर्थन नहीं करते, क्योंकि यह संगठित अपराध से जुड़ा हुआ है।” उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई भारतीय नागरिक किसी देश में तय समय से अधिक समय तक रह रहा है या उचित दस्तावेजों के बिना वहां मौजूद है, तो सरकार उनकी नागरिकता की पुष्टि करने के बाद उनकी वापसी की प्रक्रिया में मदद करेगी।
“डौंकी रूट” के जरिए पहुंचे थे ये लोग
अमेरिका द्वारा निर्वासित किए गए ये भारतीय “डौंकी रूट” यानी गैर-कानूनी तरीकों से वहां पहुंचे थे। उन्हें एजेंटों के जरिए पनामा, मैक्सिको आदि के जंगलों के रास्ते अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश करवाया गया था। इन एजेंटों की फीस प्रति व्यक्ति 35 से 40 लाख रुपये तक होती है। इस सफर के दौरान कई लोग जंगलों में भूख और प्यास से दम तोड़ देते हैं और अमेरिका तक पहुंच ही नहीं पाते।

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