अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स से युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है कोलन कैंसर का खतरा

बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान की आदतों ने कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। अब कम उम्र में ही लोग हृदय रोग, डायबिटीज और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि युवा आबादी में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है बल्कि यह मृत्यु का एक प्रमुख कारण भी बनता जा रहा है।

कोलन कैंसर क्या है
कोलन कैंसर, जिसे कोलोरेक्टल कैंसर भी कहा जाता है, बड़ी आंत या मलाशय में विकसित होने वाला कैंसर है। इसके शुरुआती लक्षणों में मल त्याग की आदतों में बदलाव, मल में खून आना और पेट में लगातार बना रहने वाला दर्द शामिल हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

युवाओं में क्यों बढ़ रहा है खतरा
पहले कोलन कैंसर अधिकतर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखा जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी इसका खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ बढ़ी हुई जांच या बेहतर निदान का परिणाम नहीं है, बल्कि खान-पान और जीवनशैली में गड़बड़ियां इसका प्रमुख कारण बनती जा रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवाओं में कोलन कैंसर के लगभग 75% मामले ऐसे हैं जिनका कोई पारिवारिक इतिहास या आनुवंशिक प्रवृत्ति नहीं होती। इन मामलों में सबसे बड़ा योगदान अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की आदत को माना जा रहा है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स से बढ़ता कैंसर का खतरा
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स अधिक मात्रा में खाते हैं, उनमें कोलन कैंसर का खतरा लगभग 29% तक बढ़ जाता है। इस अध्ययन में 46,000 से अधिक पुरुषों को 24 से 28 वर्षों तक ट्रैक किया गया। परिणामों ने स्पष्ट किया कि ऐसे खाद्य पदार्थ कैंसर के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

शरीर पर पड़ने वाला प्रभाव
शोधकर्ताओं का कहना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स शरीर में इंसुलिन के सिग्नल और कार्य को बाधित करते हैं। साथ ही ये सूजन को बढ़ाते हैं और आंत के माइक्रोबायोम में नकारात्मक बदलाव लाते हैं। इनमें पाए जाने वाले इमल्सीफायर, एडिटिव्स और कृत्रिम स्वीटनर आंतों की सूजन और ट्यूमर के विकास को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

लक्षणों को न करें नज़रअंदाज़
युवाओं में कोलन कैंसर का खतरा इसलिए और खतरनाक है क्योंकि शुरुआती लक्षण जैसे पेट दर्द, कब्ज या मल में खून आना को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। जब तक जांच होती है, बीमारी कई बार आगे बढ़ चुकी होती है।

बचाव ही है सबसे बड़ा उपाय
स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है:
• भोजन में फाइबर, हरी सब्जियों और फलों की मात्रा बढ़ाएं।
• नियमित रूप से व्यायाम करें।
• समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं।
• अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन सीमित करें।

सही जागरूकता और समय पर सावधानी इस बढ़ती स्वास्थ्य समस्या को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है। युवाओं को चाहिए कि वे अपनी दिनचर्या और भोजन की आदतों में सकारात्मक बदलाव लाकर न सिर्फ कोलन कैंसर बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी खुद को सुरक्षित रखें।

नोट: संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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