
रूस ने कैंसर के खिलाफ एक नई वैक्सीन विकसित की है, जो सभी प्रारंभिक परीक्षणों में सफल साबित हुई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैक्सीन ट्यूमर को छोटा करने और मरीजों की जीवन दर बढ़ाने में प्रभावी है।
रूस की फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) ने mRNA-आधारित इस वैक्सीन को बनाया है, जिसका नाम Enteromix रखा गया है। इसका औपचारिक ऐलान ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम 2025 में किया गया। एजेंसी के अनुसार, प्री-क्लिनिकल ट्रायल्स में यह वैक्सीन अत्यंत सफल रही और ट्यूमर रोगियों में इसका असर स्पष्ट रूप से देखा गया। इसे मुख्य रूप से बड़ी आंत के कैंसर (कोलोरेक्टल कैंसर) के लिए तैयार किया गया है।
वैक्सीन की खासियत
पिछले तीन वर्षों के अध्ययन में यह साबित हुआ है कि यह टीका सुरक्षित और प्रभावी है। इसे कई बार देने के बावजूद न तो कोई गंभीर दुष्प्रभाव सामने आया और न ही इसकी प्रभावशीलता घटी। इस टीके से न केवल ट्यूमर सिकुड़ता है, बल्कि उसकी वृद्धि भी धीमी हो जाती है।
परीक्षण और प्रभाव
वैज्ञानिकों ने इस पर तीन साल से अधिक समय तक शोध किया। पशु परीक्षणों में न केवल ट्यूमर का आकार घटा, बल्कि मरीजों की जीवन प्रत्याशा भी बढ़ी। अब इसके मानव परीक्षण (ह्यूमन ट्रायल्स) शुरू हो चुके हैं।
काम करने का तरीका
यह वैक्सीन उसी mRNA तकनीक पर आधारित है, जिसने कोविड-19 वैक्सीन को वैश्विक पहचान दिलाई थी। यह तकनीक शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट करने में सक्षम बनाती है। विशेष बात यह है कि इसे पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट के रूप में डिजाइन किया जा सकता है, यानी मरीज के कैंसर की प्रकृति के अनुसार वैक्सीन को बदला जा सकता है।
अन्य कैंसर पर शोध
शुरुआत में यह वैक्सीन केवल कोलोरेक्टल कैंसर के लिए उपलब्ध होगी, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि वे ब्रेन कैंसर (ग्लियोब्लास्टोमा) और आंख का कैंसर (ऑक्यूलर मेलेनोमा) के लिए भी इसी तकनीक से वैक्सीन पर काम कर रहे हैं, जो अंतिम चरण में है।
आम लोगों के लिए उपलब्धता
रूस सरकार के अनुसार, 2025 की पहली तिमाही से यह वैक्सीन कुछ अस्पतालों में ट्रायल उपयोग के लिए दी जा रही है और जल्द ही इसे बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराया जा सकता है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 3 लाख रूबल (लगभग 2800 अमेरिकी डॉलर) होगी। हालांकि, रूस में इसे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत निशुल्क देने की योजना है।
वैश्विक उम्मीद
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस वैक्सीन को “स्वास्थ्य विज्ञान में क्रांतिकारी उपलब्धि” बताया और कहा कि यह न केवल रूस बल्कि पूरी दुनिया के लिए कैंसर के खिलाफ एक नई आशा है।
कैंसर का वैश्विक परिदृश्य
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में दुनिया भर में लगभग 2 करोड़ नए कैंसर रोगी सामने आए और करीब 97 लाख लोगों की मौत हुई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2050 तक कैंसर के मामलों में 75% की वृद्धि हो सकती है। इसके पीछे मुख्य कारण उम्रदराज़ आबादी, अस्वस्थ जीवनशैली, तंबाकू सेवन और प्रदूषण बताए गए हैं।
भारत में स्थिति
भारत में भी कैंसर की चुनौती बढ़ रही है। 2024 में लगभग 15.3 लाख नए मामले सामने आए और 8.2 लाख से अधिक मौतें दर्ज की गईं। अनुमान है कि 2025 के अंत तक यह संख्या 15.7 लाख तक पहुंच सकती है। भारत में महिलाओं में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर और पुरुषों में मुंह व फेफड़ों का कैंसर पाया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का कैंसर से प्रभावित होना केवल चिकित्सकीय ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। समय पर जांच की कमी और महंगा इलाज इस समस्या को और गंभीर बनाता है। ऐसे में रूस की यह वैक्सीन मरीजों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद की किरण साबित हो सकती है।






