नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लीवर रोग भारत में तेजी से फैल रही एक आम समस्या बन चुका है। खराब खानपान और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली इसके मुख्य कारण हैं। इस स्थिति में लीवर में फैट (वसा) जमा होने लगता है। थोड़ी मात्रा में वसा का होना सामान्य है, लेकिन अगर इसकी मात्रा अधिक हो जाए तो यह लीवर के कार्यों में बाधा डालने लगता है। चूँकि लीवर हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो हमें स्वस्थ बनाए रखने में कई तरह के अहम कार्य करता है। जब लीवर में कोई समस्या होती है तो यह शरीर के अन्य हिस्सों के माध्यम से संकेत देता है, जिनकी सही समय पर पहचान और इलाज करना बहुत ज़रूरी होता है।
फैटी लीवर दो प्रकार का होता है
• पेडल एडिमा: पैरों और टखनों में तरल पदार्थ जमा होने से सूजन।
• पीटिंग एडिमा: दबाव डालने के बाद भी सूजन का गड्ढा बने रहना।
समय पर इलाज है ज़रूरी
पेडल एडिमा लीवर को हुए नुकसान का शुरुआती चेतावनी संकेत हो सकता है। इसलिए इस लक्षण को हल्के में न लें। बीमारी का समय पर पता चलने और उचित इलाज से न केवल आपका लीवर सुरक्षित रह सकता है, बल्कि आपकी जान भी बच सकती है।
- अल्कोहॉलिक फैटी लीवर – यह अत्यधिक शराब सेवन के कारण होता है।
- नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लीवर – यह मोटापा, मधुमेह, खराब डाइट और शारीरिक रूप से सक्रिय न रहने से जुड़ा होता है।
यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए तो नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लीवर रोग बढ़कर नॉन-अल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस, सिरोसिस और यहां तक कि लीवर कैंसर का रूप भी ले सकता है।
कब देता है लीवर अलार्म
फैटी लीवर के शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते। लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन, थकान महसूस होना और बिना किसी कारण वजन कम होना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। गंभीर स्थिति में पैरों व पेट में सूजन, पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना), गहरे रंग का मूत्र, हल्के रंग का मल और मानसिक भ्रम जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
पैरों की सूजन को न करें अनदेखा
ब्रिटेन की एक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, पैरों की सूजन (पेडल एडिमा) भी फैटी लीवर का एक प्रमुख संकेत हो सकता है। कई बार लोग इसे लंबे समय तक खड़े रहने या अधिक चलने की वजह से हुई सामान्य सूजन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। पहचान के लिए जहां सूजन हो वहां की त्वचा को कुछ सेकंड तक दबाएं। अगर उंगली हटाने के बाद भी गड्ढा बना रहता है तो इसे पीटिंग एडिमा कहा जाता है, जो शरीर में तरल पदार्थ के जमा होने का संकेत है।






