पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि अफगान तालिबान के साथ बातचीत नाकाम रहती है, तो पाकिस्तान के पास युद्ध का विकल्प खुला रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि बीते चार से पांच दिनों से सीमा पर शांति बनी हुई है।
दरअसल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए तुर्किये के इस्तांबुल में वार्ता का दूसरा दौर हुआ। दोनों देशों ने एक संयुक्त निगरानी तंत्र (मॉनिटरिंग सिस्टम) बनाने पर चर्चा की, ताकि सीमा पार होने वाली आतंकी घटनाओं और व्यापारिक अड़चनों को दूर किया जा सके। इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच स्थायी राजनीतिक समझ विकसित करने के प्रयासों पर भी विचार हुआ। पाकिस्तान ने इस बैठक में अफगान तालिबान को एक व्यापक आतंकवाद-रोधी योजना सौंपी।
इससे पहले, 19 अक्तूबर को कतर के दोहा में हुई बैठक में अस्थायी शांति बहाली पर सहमति बनी थी। तुर्किये ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। हालांकि पाकिस्तान अब भी सख्त रुख अपनाए हुए है। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि दोहा में हुए समझौते के 80 प्रतिशत बिंदुओं को लागू किया जा चुका है, लेकिन अगर अफगान तालिबान ने सहयोग नहीं किया तो युद्ध की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने चार दशकों तक अफगानों की मेजबानी की, इसके बावजूद अफगानिस्तान से आतंकवाद को बढ़ावा मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने जानकारी दी कि पाकिस्तान ने अफगान तालिबान से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अफगानिस्तान के अंतरिम प्रशासन के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के अनुसार, अफगान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय के उप मंत्री मौलवी रहमतुल्लाह नजीब ने किया।
अफगानिस्तान ने सहयोग नहीं किया तो फिर छिड़ सकती है लड़ाई- ख्वाजा आसिफ






