13 सितंबर को झारखंड के चाईबासा सरकारी अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाया गया था। 18 अक्टूबर को आई जांच रिपोर्ट में बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। इस पर पीड़ित बच्चों के परिजनों ने तकनीकी अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस गंभीर मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए चाईबासा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन समेत संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य सरकार ने घोषणा की है कि सभी पीड़ित बच्चों का इलाज सरकारी खर्चे पर कराया जाएगा और उनके परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से भी कह दिया है कि राज्य में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का एचआईवी से संक्रमित होना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है।
शनिवार को पांच सदस्यीय जांच टीम द्वारा की गई जांच में छह और थैलेसीमिया बच्चों की रिपोर्ट भी पॉजिटिव पाई गई। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जो एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। प्रारंभिक जांच में एक बच्चे में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है। मंत्री ने कहा कि जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि संक्रमित रक्त अस्पताल के रक्त अधिकोष से लिया गया था या बाहर से। उन्होंने यह भी बताया कि एचआईवी संक्रमण की पूरी पुष्टि में लगभग चार सप्ताह का समय लगता है और “विंडो पीरियड” के दौरान संक्रमित व्यक्ति का रक्त ट्रांसफ्यूज होने पर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को पूरे प्रकरण की जानकारी दी जा चुकी है और उन्होंने स्वयं इस पर त्वरित व कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार का स्पष्ट कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
झारखंड: थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को अस्पताल में चढ़ाया एचआईवी संक्रमित ब्लड





