
त्योहारों का समय व्यस्त जीवन में सुकून के कुछ पल लेकर आता है, जब बच्चे अपने उन रिश्तेदारों से जुड़ते हैं जिनसे वे सामान्य दिनों में बात करने से कतराते हैं। त्योहारों के बहाने रिश्तों में जो नई गर्माहट आई है, उसे बनाए रखने के लिए बच्चों को प्रेरित करना जरूरी है ताकि यह अपनापन त्योहारों के बाद भी कायम रहे।
बच्चों को रिश्तेदारों से जोड़ें
त्योहार रिश्तों को मजबूत करने का सुंदर अवसर होते हैं। सकारात्मक रिश्ते न केवल सामाजिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक हैं। उदाहरण के तौर पर 14 साल की सान्वी की ही मिसाल लें, वह अब तक दीपावली के फोटो और वीडियो अपने वाट्सऐप स्टेटस पर शेयर कर रही है। कभी चाचू के साथ लाइट सजाने का फोटोशूट, तो कभी बुआ के बच्चों के साथ मिडनाइट स्नैकिंग के मजेदार पल। पहले वह पापा के फोन पर मुश्किल से “हैलो” बोलती थी, पर अब उसने सबके नंबर सेव कर लिए हैं और पारिवारिक ग्रुप बना लिए हैं, जहां अब शादी की तैयारियों की चर्चा चल रही है। भाई दूज पर मामा के साथ एडवेंचर पार्क की मस्ती ने उसकी दिवाली को यादगार बना दिया। ऐसा ही होता है जब बच्चे रिश्तेदारों के साथ घुलते-मिलते हैं। वे परिवार के सदस्यों को बेहतर समझते हैं, उनके स्वभाव, पसंद-नापसंद को जान पाते हैं। इस मेलजोल से गलतफहमियां दूर होती हैं और आत्मीयता बढ़ती है। बड़े कजिन्स बच्चों के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं, जो उनके आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को मजबूत करता है।
त्योहार की गरमाहट को बनाए रखें
त्योहार की खुशी सिर्फ कुछ दिनों तक सीमित न रहे। आज जब बच्चे तकनीक से जुड़े हैं, तो डिजिटल माध्यम से परिवार की गर्मजोशी बनाए रखी जा सकती है। माता-पिता बच्चों को प्रेरित करें कि त्योहारों के बाद भी रिश्तेदारों से संपर्क बनाए रखें। बच्चों को पारिवारिक वाट्सऐप ग्रुप में शामिल करें, कभी-कभी चैट या वीडियो कॉल करें, शुभकामनाएं भेजें। सप्ताहांत में परिवार के साथ ऑनलाइन गेम्स या छोटे वर्चुअल इवेंट आयोजित किए जा सकते हैं। जब भी मौका मिले, फैमिली गैदरिंग या रियूनियन जरूर करें। इस तरह बच्चे आपस में बातचीत करते हैं, रील्स बनाते हैं, पुराने फोटो साझा करते हैं और रिश्ते और गहरे हो जाते हैं।

रिश्तों की गहराई
अपनों से जुड़ाव न केवल सामाजिक मजबूती देता है बल्कि मानसिक सुकून भी। आज जब मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, तो सकारात्मक रिश्ते बच्चों के मनोबल को बढ़ाते हैं। परिवार के लोगों से संवाद, मीम या संदेश साझा करना भी अपनापन बढ़ाने का एक सरल तरीका है।
ध्यान रखें, बच्चों के सामने किसी रिश्तेदार के बारे में नकारात्मक बातें न करें। त्योहार, जन्मदिन या वर्षगांठ पर शुभकामनाएं देते समय बच्चों को भी शामिल करें। बच्चे वही सीखते हैं जो वे माता-पिता से देखते हैं।
जो रिश्ता त्योहारों में फिर से जुड़ने लगा है, उसे कुछ दिनों का सिलसिला न रहने दें, बल्कि उसे जीवनभर की गर्मजोशी में बदल दें…




