चुनाव आयोग ने सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण की घोषणा की। इस चरण में देश के 12 राज्यों में यह प्रक्रिया की जाएगी। हालांकि, आयोग के इस ऐलान के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। कई विपक्षी दलों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके ने तो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़ा कर दिया।डीएमके प्रवक्ता सर्वानन अन्नादुरई ने आरोप लगाया कि “असम में एसआईआर क्यों नहीं किया जा रहा है? क्या यह प्रक्रिया नागरिकता जांचने का नया तरीका बन गई है? बिहार में कितने फर्जी मतदाता मिले? 2003 को ही कटऑफ वर्ष क्यों बनाया गया?” उन्होंने कहा कि इससे किसे फायदा होगा, इस पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं है। डीएमके ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहा है और वोट चोरी में शामिल है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी एसआईआर प्रक्रिया की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का यह कदम मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करता है और यह 1950 के “रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट” और 1960 के “रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स” का उल्लंघन है। विजयन के अनुसार, संशोधन मौजूदा वोटर लिस्ट के आधार पर होना चाहिए, न कि 2002-2004 की सूची के आधार पर।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है और पार्टी इसका स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन इसका विरोध सिर्फ अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए कर रहा है, जबकि महाराष्ट्र में इन्हीं दलों ने स्थानीय चुनावों से पहले एसआईआर की मांग की थी।
पश्चिम बंगाल भाजपा ने टीएमसी के बयान पर पलटवार किया। भाजपा नेता केया घोष ने कहा कि पार्टी का मानना है कि बंगाल में किसी भी तरह के फर्जी या अवैध मतदाता नहीं होने चाहिए। ममता बनर्जी की सरकार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से इसलिए घबराई हुई है क्योंकि उनके वोटबैंक में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए शामिल हैं। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी को डर है कि एसआईआर के बाद ऐसे अवैध मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाएंगे। टीएमसी ने भी कहा कि वह पारदर्शी मतदाता सूची के पक्ष में है, लेकिन यदि किसी वैध मतदाता को परेशान किया गया, तो पार्टी इसका विरोध करेगी। टीएमसी ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग राजनीतिक दबाव में कोई अनुचित कदम नहीं उठाएगा।
भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा कि विपक्ष देशहित के हर कदम का विरोध करता है। एसआईआर में किसी वैध मतदाता का नाम नहीं हटेगा, बल्कि अवैध और फर्जी नामों पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि कोई भी बांग्लादेशी भारत का मतदाता नहीं बन सकेगा और उम्मीद जताई कि सभी राज्य सरकारें इस प्रक्रिया में सहयोग करेंगी।
एसआईआर; चुनाव आयोग की घोषणा के बाद से कई राजनीतिक दलों को आपत्ति



