दिल्ली की हवाओं में ‘ जहर घुला ’ सुप्रीम कोर्ट ने सीएक्यूएम से मांगी रिपोर्ट

2 नवंबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 366 दर्ज किया गया था, लेकिन अगले ही दिन यानी 3 नवंबर को यह घटकर 309 पर पहुंच गया। सतह पर यह सुधार राहत भरा प्रतीत होता है, मगर वायु प्रदूषण विशेषज्ञों का कहना है कि यह हवा की सफाई नहीं, बल्कि आंकड़ों में की गई सुनियोजित हेरफेर का परिणाम है। हर साल नवंबर में दिल्ली की जहरीली हवा लोगों का दम घोंटती है, और इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मॉनिटरिंग सिस्टम में डेटा गैप्स, मापने की पद्धति में असंगतियां और एल्गोरिदम की खामियों के चलते वास्तविक स्थिति धुंधली पड़ रही है। कई बार तो ऐसा होता है कि जब प्रदूषण स्तर बेहद खराब होता है, तब दिल्ली के 39 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से कई का लाइव डेटा उपलब्ध ही नहीं रहता।
सीपीसीबी के अनुसार, 2 नवंबर को कई स्टेशनों पर एक्यूआई 400 से ऊपर यानी गंभीर श्रेणी में था, जैसे आनंद विहार (400+), बुराड़ी (404), चांदनी चौक (404), आरके पुरम (401) और वजीरपुर (418)। मगर 3 नवंबर को औसत एक्यूआई घटकर 309 हो गया। विशेषज्ञों ने इसे संदिग्ध बताया, क्योंकि इस दौरान कई स्टेशनों से पीएम 2.5 का डेटा गायब रहा और एल्गोरिदम ने पीएम 10 या अन्य गैसों को प्राथमिकता दी, जिससे कृत्रिम सुधार दिखा।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स जैसे IQAir पर एक्यूआई 1000 से अधिक दर्ज था, जबकि सीपीसीबी पर यह 400 से कम दिखाया गया, जो डेटा मैनिपुलेशन का संकेत है। उन्होंने कहा कि आंकड़े “वाटर स्प्रिंकलर्स” या “सॉफ्टवेयर ट्रिक्स” से साफ किए गए, हवा नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) से रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने कहा कि दीपावली के दौरान केवल 9 स्टेशन ही पूरी तरह कार्यरत थे, जिससे “मिसिंग डेटा” की समस्या बढ़ी।
वर्तमान में हवा की दिशा और गति बदलने से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण में अस्थायी गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को राजधानी का एक्यूआई 202 रहा, जो “खराब” श्रेणी में है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट अस्थायी है और आने वाले दिनों में हवा फिर “बेहद खराब” श्रेणी में पहुंच सकती है।
सीपीसीबी के अनुसार, लगातार 23वें दिन दिल्लीवासी खराब हवा में सांस ले रहे हैं। पिछले एक महीने से प्रदूषण का स्तर “खराब” से “बेहद खराब” के बीच बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आंकड़ों की यह “धूल” असली समस्या यानी पराली, वाहन धुआं और मौसमीय परिस्थितियों से ध्यान भटका रही है।

सीपीसीबी के अनुसार दिल्ली का बीते 10 दिन का एक्यूआई इस प्रकार रहा है:

26 अक्तूबर: 321
27 अक्तूबर: 301
28 अक्तूबर: 294
29 अक्तूबर: 279
30 अक्तूबर: 373
31 अक्तूबर: 218
1 नवंबर: 303
2 नवंबर: 366
3 नवंबर: 309
4 नवंबर: 291
5 नवंबर: 202

विशिखा मीडिया

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