राघव चड्ढा दो-तिहाई सांसदों के साथ भाजपा में शामिल

मूल सिद्धांतों से भटक गई है आप: राघव चड्ढा

आम आदमी पार्टी (आप) के लिए बड़ा राजनीतिक झटका सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने दो-तिहाई सांसदों के समर्थन के साथ पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का ऐलान किया है। पद से हटाए जाने और लंबे समय से चल रहे वैचारिक मतभेदों के बीच हुए इस घटनाक्रम ने राज्यसभा में आप की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर है कि राघव चड्ढा के साथ किन-किन सांसदों ने पार्टी से दूरी बनाई है। राघव चड्ढा का इस्तीफा केवल व्यक्तिगत फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्यसभा में आप के लिए बड़े संकट के रूप में देखा जा रहा है। उनके साथ अशोक कुमार मित्तल और संदीप पाठक जैसे प्रमुख नेताओं ने भी पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है, जिससे संगठन की मजबूती पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

आप छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं का प्रोफाइल
भाजपा में शामिल होने के ऐलान के साथ ही राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मैं गलत पार्टी में सही व्यक्ति था।” चड्ढा के मुताबिक, आप अब अपने मूल सिद्धांतों से दूर हो चुकी है और वैचारिक रूप से कमजोर हो गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे और उनके समर्थक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए भाजपा का दामन थाम रहे हैं। राघव चड्ढा ने दावा किया है कि राज्यसभा में आप के दो-तिहाई सांसद उनके संपर्क में हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत इसे वैध विलय माना जा सकता है और संबंधित सांसदों की सदस्यता पर खतरा नहीं आएगा। उनके अनुसार, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह और राजिंदर गुप्ता जैसे नाम भी इस समूह में शामिल हैं।

राघव चड्ढा
चार्टर्ड अकाउंटेंट पृष्ठभूमि वाले राघव चड्ढा 2012 में अन्ना हजारे आंदोलन के दौरान आप से जुड़े। वे अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगियों में गिने जाते रहे हैं और पार्टी की रणनीति में अहम भूमिका निभाते रहे। 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बने चड्ढा युवा और मुखर चेहरे के रूप में उभरे।

अशोक कुमार मित्तल
पंजाब के प्रमुख उद्योगपति परिवार से जुड़े अशोक मित्तल सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। 2022 में उन्हें आप ने राज्यसभा भेजा और अप्रैल 2026 में उन्हें डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

संदीप पाठक
पार्टी के पुराने और जमीनी कार्यकर्ता माने जाने वाले संदीप पाठक पंजाब इकाई में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। 2022 में वे राज्यसभा पहुंचे और संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाते रहे।

हरभजन सिंह
पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हरभजन सिंह 2022 में आप के टिकट पर राज्यसभा सांसद बने। वे खेल और युवा मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं, हालांकि राजनीति में उनकी सक्रियता सीमित रही है।

विक्रमजीत सिंह साहनी
उद्योगपति और शिक्षाविद विक्रमजीत सिंह साहनी सामाजिक और मानवीय कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं। 2022 में उन्हें आप ने राज्यसभा भेजा था।

राजिंदर गुप्ता
पद्मश्री से सम्मानित उद्योगपति राजिंदर गुप्ता 2025 में उपचुनाव के जरिए राज्यसभा पहुंचे। वे आर्थिक और औद्योगिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

स्वाति मालीवाल
महिला अधिकारों की पैरोकार और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल 2024 में राज्यसभा सांसद बनीं। वे अपने स्पष्ट रुख और सक्रियता के लिए जानी जाती हैं।

कई हफ्तों से बन रही थी बगावत की जमीन
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ। 2 अप्रैल 2026 को पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के डिप्टी लीडर पद से हटाया था और उनके अधिकारों में कटौती के संकेत भी मिले थे। इसके बाद से असंतोष लगातार बढ़ता गया। राघव चड्ढा और उनके सहयोगियों का पार्टी छोड़ना आप के लिए एक बड़ा संगठनात्मक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब पार्टी की कमान कुछ चुनिंदा नेताओं के हाथों में सिमटती दिख रही है, जिससे आने वाले समय में इसकी रणनीति और प्रभाव दोनों पर असर पड़ सकता है।

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