
पैन कार्ड मामले में दोषी पाए जाने के बाद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम ख़ां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को सात साल की सज़ा सुनाई गई है। सजा के बाद उन्हें रामपुर जेल भेजा गया, जहाँ घर से कंबल न मिलने पर आजम ख़ां नाराज़ हो गए। जेल प्रशासन ने स्पष्ट कहा कि नियमों के अनुसार घर का सामान अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है। इसी के चलते आजम ने ए कैटेगरी की जेल सुविधा देने की मांग की है, जबकि रामपुर जेल बी कैटेगरी में आती है। जेल अधीक्षक राजेश यादव के अनुसार, आजम और उनके बेटे ने घर से कंबल मंगवाए थे, लेकिन जेल नियमों का हवाला देते हुए उन्हें लौटा दिया गया। सोमवार और मंगलवार दोनों दिन आजम को जेल का बना खाना ही परोसा गया, जिसे उन्होंने खाया। सूत्रों का कहना है कि कंबल न मिलने पर आजम ने जेल स्टाफ पर नाराज़गी भी जताई। फिलहाल वह बैरक नंबर एक में बंद हैं।
जेल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कोर्ट को रिपोर्ट भेजी है, जिसमें कहा गया है कि जेल में राजनीतिक कैदियों के लिए उच्च स्तर की बैरक उपलब्ध नहीं है। अब यह कोर्ट पर निर्भर करेगा कि आजम और अब्दुल्ला को रामपुर में रखा जाएगा या किसी और जेल में शिफ्ट किया जाएगा। सोमवार को अदालत में आजम ने आग्रह किया था कि उन्हें अपने बेटे के साथ ए कैटेगरी जेल में रखा जाए और सुरक्षा को देखते हुए रात के समय दूसरी जेल में शिफ्ट न किया जाए। मंगलवार को आजम खान और अब्दुल्ला के बेटे अदीब आजम तथा बार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सतनाम सिंह मटू उनसे मिलने पहुंचे। अदीब ने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन ने उन्हें पिता से मिलने की अनुमति नहीं दी और वह केवल अपने भाई अब्दुल्ला से मिल पाए।
पैन कार्ड मामले में सात साल की सज़ा
रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम ख़ां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड रखने के आरोप में सात-सात साल की कैद और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई है। 2019 में शहर विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में यह मामला दर्ज कराया था। फैसले के बाद दोनों को हिरासत में लेकर कड़ी सुरक्षा में रामपुर जेल भेजा गया। कोर्ट ने माना कि अब्दुल्ला आजम ने दो पैन कार्ड बनवाए और उनका लाभ लिया। चुनाव नामांकन में भी उनकी उम्र संबंधी दस्तावेज़ों पर सवाल उठे थे। 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान जमा किए गए प्रमाणपत्रों में जन्म तारीख अधिक दिखाई गई थी। अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र रखने के मामले में भी 18 अक्टूबर 2023 को एमपी-एमएलए कोर्ट आजम ख़ां, अब्दुल्ला और उनकी मां डॉ. तज़ीन फात्मा को सात-सात साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना सुना चुकी है। हालांकि इस मामले में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।





