भारतीय रेलवे में सिर्फ हलाल प्रमाणित मीट परोसे जाने की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी द्वारा संचालित ट्रेनों एवं स्टेशनों की कैटरिंग सेवाओं में केवल हलाल पद्धति से तैयार किया गया मीट ही उपलब्ध कराया जाता है। उनके अनुसार, इससे गैर-मुस्लिम यात्रियों विशेषकर हिंदू, सिख और अनुसूचित जाति समुदायों की धार्मिक भावनाएँ और मानवाधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
लंबे समय से विवाद जारी
रेलवे में केवल हलाल मीट परोसने का मुद्दा कई वर्षों से विवाद में बना हुआ है। इस पर अनेक याचिकाएँ दायर हो चुकी हैं और सोशल मीडिया पर भी बहस होती रही है।आईआरसीटीसी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि हलाल प्रमाणन अनिवार्य नहीं है और विभिन्न समुदायों के सप्लायर्स को मौका दिया जाता है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वास्तविकता में अधिकतर सप्लायर हलाल सर्टिफाइड ही होते हैं।
आयोग ने इसे मानवाधिकार से जुड़ा मुद्दा मानते हुए मामले को गंभीरता से लिया है। शिकायत में धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25), समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14) और व्यवसाय की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(g)) जैसे संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का प्रश्न उठाया गया है। इसी आधार पर रेलवे बोर्ड से जवाब मांगा गया है।





