श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस, कटड़ा में एमबीबीएस प्रवेश प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के प्रधान, सेवानिवृत्त कर्नल सुखबीर सिंह मनकोटिया के अनुसार, इस पूरी गड़बड़ी के लिए श्राइन बोर्ड सीधे तौर पर जिम्मेदार है और इसकी विस्तृत जांच होनी आवश्यक है। उन्होंने बातचीत के दौरान बेझिझक अपनी बात रखी। संस्थान में एमबीबीएस प्रवेश को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। पारदर्शिता के अभाव और निर्धारित नियमों के पालन पर कई प्रश्न उठ रहे हैं। इस मामले पर संघर्ष समिति ने श्राइन बोर्ड और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर गहरी आपत्तियाँ जताई हैं।
सवाल – आपके अनुसार इस पूरे मामले के लिए कौन जिम्मेदार है?
सबसे बड़ी चूक माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से हुई है। प्रवेश संबंधी नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया और कई महत्वपूर्ण सूचनाएँ छिपाई गईं। विज्ञापन भी ठीक प्रकार से जारी नहीं किए गए, जिससे योग्य छात्रों—चाहे वे किसी भी धर्म के हों—को समान अवसर नहीं मिल पाया। यह आवश्यक है कि निष्पक्ष जांच द्वारा पता चले कि यह चूक क्यों हुई और इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं।
सवाल – निदेशक का कहना है कि सभी नियमों का पालन हुआ है और किसी धर्म के साथ भेदभाव नहीं किया गया?
यह मामला हिंदू–मुस्लिम का नहीं, बल्कि न्याय और समान अवसर का है। समिति का मानना है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। हालांकि कुछ लोग विवाद को धार्मिक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन संघर्ष समिति ऐसा नहीं मानती। प्रवेश प्रक्रिया में हुई त्रुटियों के कारण सनातन धर्म मानने वालों की भावनाएँ आहत हुई हैं, और हम वही चिंता प्रशासन के सामने रख रहे हैं। संस्थान ने जानबूझकर प्रवेश प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की, जो जांच का विषय है। जब अन्य राज्यों में काउंसिलिंग पहले ही पूरी हो चुकी थी, तब यहां सत्र देर से शुरू करना उचित नहीं था। यदि नियमों का सही पालन होता, तो विवाद ही उत्पन्न नहीं होता।
सवाल – अब समाधान क्या होना चाहिए?
संघर्ष समिति की मांग है कि पूरी प्रवेश प्रक्रिया रद्द की जाए। जिन छात्रों का दाखिला हो चुका है, उनका नुकसान न हो—इसकी जिम्मेदारी सरकार ले। उनकी पढ़ाई किसी अन्य मेडिकल कॉलेज में जारी करवाई जाए और उचित मुआवजा दिया जाए। माता वैष्णो देवी देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए श्राइन बोर्ड को ऐसे कदम उठाने चाहिए जो सनातन संस्कृति के अनुरूप हों।
सवाल – यदि श्राइन बोर्ड संस्थान चला रहा है तो खान-पान और पूजा पद्धति के नियम वही तय करेगा, इसमें समस्या क्या है?
संघर्ष समिति का कहना है कि संस्थान में मुस्लिम छात्रों के होने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनकी मांग केवल इतनी है कि श्राइन बोर्ड से जुड़े संस्थानों में सनातन परंपराओं का सम्मान बरकरार रहना चाहिए। कटड़ा और आसपास के क्षेत्रों में माता वैष्णो देवी मंदिर होने के कारण मांस की बिक्री प्रतिबंधित है। देशभर में कई धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित कॉलेजों में भी छात्रों को संबंधित धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना पड़ता है। समिति की चिंता यह है कि कटड़ा में वर्तमान व्यवस्था में बदलाव न आए।
सवाल – क्या धार्मिक संस्थाओं को अस्पताल जैसी सेवाभावी गतिविधियों तक ही सीमित रहना चाहिए?
यदि धार्मिक संस्थाएँ सेवाभाव के कार्य करती हैं, तो यह सराहनीय है। श्राइन बोर्ड अस्पताल चलाता है और सभी धर्मों के लोग इलाज के लिए वहां आते हैं। यह पवित्र सेवा है। लेकिन मेडिकल कॉलेज चलाने में जो गंभीर कमियाँ सामने आई हैं, उनके बावजूद इसे जारी रखने की जिद समझ से परे है। श्राइन बोर्ड को अपनी त्रुटियाँ शीघ्र सुधारनी चाहिए।
सवाल – उमर अब्दुल्ला के उस बयान पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है, जिसमें कहा गया कि मुस्लिम छात्रों को पढ़ाया नहीं जा सकता तो वे बांग्लादेश या तुर्की चले जाएँ?
कर्नल मनकोटिया ने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। पर यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने सिर्फ उन्हीं दो–तीन देशों का नाम क्यों लिया।
सवाल – संघर्ष समिति की आगे की रणनीति क्या है?
समिति सभी पहलुओं पर विचार कर के कदम उठा रही है। कई जिलों में समिति की इकाइयाँ बन चुकी हैं और कई स्थानों पर ब्लॉक स्तर की समितियाँ भी सक्रिय हैं। ये टीमें घर–घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रही हैं। समिति ने राष्ट्रपति और उपराज्यपाल को ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रतिक्रिया मिलेगी। उसके बाद अगली रणनीति तय की जाएगी। सड़कों पर उतरना अंतिम विकल्प होगा।






