
ट्रेन के कोचों की संख्या आठ से बढ़ाकर 20 की गई, 2 मई से नियमित रूप से चलेगी यह ट्रेन
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज जम्मू तवी से श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस सेवा में बड़ा बदलाव करते हुए ट्रेन के कोचों की संख्या 8 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है। यह विस्तारित सेवा 2 मई से नियमित रूप से संचालित होगी। उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद रहे। इस दौरान जम्मू तवी–श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस के विस्तारित मार्ग को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई गई।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए 20 कोच वाली विशेष वंदे भारत सेवा शुरू की गई है। उन्होंने याद दिलाया कि एक वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कटरा से 8 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन के साथ जम्मू–श्रीनगर रेल लिंक का उद्घाटन किया था। उस सेवा को यात्रियों का व्यापक समर्थन मिला, जिसके चलते क्षमता विस्तार की आवश्यकता महसूस हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वंदे भारत और रेलवे सेवाओं के विस्तार की सराहना करते हुए इसे क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे जम्मू-कश्मीर में रेल कनेक्टिविटी और अधिक सुदृढ़ होगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पहले 8 कोच के साथ संचालित हो रही इस सेवा को अब 20 कोच तक विस्तारित किया गया है, जिससे यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी। पुलिस महानिरीक्षक आरपीएफ पंकज गंगवार ने भी इस विस्तार की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया है। सुरंगों और पटरियों की निगरानी जीआरपी और सीआरपीएफ द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। इस बीच, रेल मंत्री ने वंदे भारत ट्रेन से कटरा तक यात्रा कर परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया और जम्मू से श्रीनगर तक ट्रेन संचालन को एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। बारामूला से उरी तक नई रेल लाइन बिछाने की तैयारी चल रही है, जबकि जम्मू–राजोरी–पुंछ रेल लाइन के सर्वे का कार्य तेज गति से जारी है। इसके अलावा, जम्मू रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रेल मंत्री ने संकेत दिया कि भविष्य में दिल्ली से श्रीनगर के बीच सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने की योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए विशेष तकनीक से लैस ट्रेनों का संचालन आवश्यक है, जिस पर रेलवे लगातार काम कर रहा है।




