सपा अवधेश के सहारे,बीजेपी के हिंदुत्व को देगी चुनौती

समाजवादी पार्टी अयोध्या लोकसभा सीट से सपा की जीत को एक बड़ा सियासी मुद्दा बनाने का हर जतन कर रही है। जाने-अंजाने वह बीजेपी से लड़ते-लड़ते प्रभु श्रीराम को ‘चुनौती’ देने लगी हैं। सपा सांसद धमेन्द्र यादव का वह कृत्य कैसे भुलाया जा सकता है जब संसद के भीतर वह अयोध्या से विजय हुए अवधेश प्रसाद की शान में ‘जय अवधेश’ के नारे लगाते हैं। वह कहीं न कहीं ऐसा करके जय श्री राम के समानांतर अवधेश प्रसाद को खड़ा दिखाने की साजिश कर रहे थे। इतना नहीं सपा द्वारा सांसद अवधेश को अयोध्या का राजा बताया जा रहा था, जबकि समाजवादी जानते हैं कि अयोध्या के राजा प्रभु श्री राम थे। यह बात आज तक निर्विवाद सत्य है। इसी तरह उनको सपा संसद में सबसे आगे की कुर्सी पर बैठाती है, जबकि समाजवादी पार्टी के अन्य दो-तीन बार तक के सांसद अवधेश प्रसाद के पीछे की कुर्सियों पर बैठे नजर आते हैं। हालात यह है कि अब तो विपक्ष अवधेश प्रसाद को डिप्टी स्पीकर का चुनाव लड़ाने की भी बात कहने लगा है,जबकि वह पहली बार लोकसभा चुनाव जीत कर आये हैं। ऐसा लगता कि अयोध्या को समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी एजेडे में शामिल कर लिया है। ऐसा करके वह बीजेपी के हिन्दुत्व कार्ड को चुनौती तो अपने पीडीए वाले एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहते हैं। अवधेश दलित समाज से आते हैं,इसके जरिये भी वह दलितों को बड़ा संदेश देना चाहते हैं। यह सिलसिला फिलहाल थमने वाला नहीं लगता है। अभी दस सीटों पर विधान सभा चुनाव होने हैं। सपा देखना चाहती है कि इसका उसे चुनाव में कितना फायदा मिलेगा। यदि उप चुनाव में भी सपा का प्रदर्शन बेहतर रहा हो वह 2027 के विधान सभा चुनाव तक अपने इसी एजेंडे को आगे बढ़ा सकता है।
ऐसा इसलिये हो रहा है क्योंकि विपक्षी नेताओं की आपसी चर्चा में लोकसभा के डिप्टी स्पीकर पद के लिए अवधेश प्रसाद के नाम पर बेझिझक सहमति की सबसे बड़ी वजह है कि आइ.एन.डी.आइ.ए. फैजाबाद में भाजपा की हार को देश की रणनीति के लिए एक बड़ा निर्णायक संदेश मान रहा है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल कह चुके हैं कि अयोध्या से जुड़े फैजाबाद में सपा के अवधेश प्रसाद की जीत भाजपा के वैचारिक धारा की शिकस्त का बड़ा संदेश है। इस अनारक्षित लोकसभा सीट पर दलित समुदाय से आने वाले अवधेश प्रसाद ने भाजपा को पराजित किया है। फैजाबाद के सांसद को राजनीतिक अहमियत देने का संदेश तो 18 वीं लोकसभा की पहली बैठक में ही दे दिया गया था। जब अखिलेश अपने एक हाथ में संविधान और दूसरे हाथ से अवधेश प्रसाद को थामे सदन में पहुंचे। राहुल गांधी ने भी अवधेश प्रसाद को उसी दिन से विपक्ष के प्रमुख चेहरों में रखने का संदेश देते हुए उन्हें पहली पंक्ति में अपने साथ बिठाते हुए चर्चा की।
राहुल ने अखिलेश से बातचीत में अवधेश को डिप्टी स्पीकर बनाने का प्रस्ताव रखा, जिस पर सपा प्रमुख ने सहर्ष हामी भरी। इसके बाद जब राहुल की अखिलेश और अभिषेक से एक साथ मंत्रणा हुई तो टीएमसी नेता ममता बनर्जी, शरद पवार व एमके स्टालिन ने भी उनके नाम पर सहमति जता दी। विपक्ष की ओर से डिप्टी स्पीकर के लिए उम्मीदवार का औपचारिक ऐलान तभी होगा जब सरकार चुनाव कराने की घोषणा करेगी। संसद सत्र में तीन दिन बचे है। आईएनडीआईए का कहना है डिप्टी स्पीकर का पद परंपरागत रूप से विपक्ष को दिया जाता है, जैसे वाजपेयी के कार्यकाल में कांग्रेस के पीएम सईद को डिप्टी स्पीकर बनाया गया।
दरअसल, विपक्ष डिप्टी स्पीकर पद पर परंपरागत रूप से अपनी स्वाभाविक दावेदारी मान रहा है पर एनडीए सरकार तैयार नहीं हुई तो फिर चुनाव की स्थिति में भी अवधेश प्रसाद ही विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में उतरेंगे। कांग्रेस सूत्रों ने डिप्टी स्पीकर पद के लिए शीर्ष विपक्षी नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत होने का संकेत देते हुए कहा कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की सपा प्रमुख अखिलेश यादव और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी संग इसको लेकर चर्चा की थी।
अजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ

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