त्योहारों के मौसम और मुहर्रम पर शांति, सरकार की बड़ी कसौटी

उत्तर प्रदेश में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। सावन का महीना भी लगने वाला है। वहीं इसी दौरान मुहर्रम का सिलसिला भी शुरू हो जायेगा। ऐसे में कानून व्यवस्था सरकार और पुलिस के लिये बढ़ी चुनौती होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कांवड़ यात्रा हो या मुहर्रम सभी की आस्था का सम्मान किया जाए, लेकिन नई परंपरा की अनुमति नहीं दी जाएगी। 22 जुलाई से पवित्र श्रावण मास का प्रारंभ हो रहा है। इस अवधि में श्रावणी शिवरात्रि, नागपंचमी और रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। परंपरागत कांवड़ यात्रा निकलेगी। इसलिए सरकार ने आदेश दिया है कि पिछले वर्षों में हुई दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार निर्धारित आवाज में ही डीजे बजाने की अनुमति दी जाए और उसकी ऊंचाई भी ज्यादा न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि सात से नौ जुलाई तक जगन्नाथ रथ यात्रा, सात व आठ से 17-18 जुलाई तक मोहर्रम और 21 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पावन अवसर है। इसलिए सभी संबंधित विभाग इसकी तैयारियां समय से कर लें।
गौरतलब हो, कांवड़ यात्रा की दृष्टि से उत्तराखंड की सीमा से लगे जिलों के अलावा गाजियाबाद, मेरठ, अयोध्या, बरेली, प्रयागराज, वाराणसी, बाराबंकी व बस्ती जिले महत्वपूर्ण हैं। कावंड़ यात्रा आस्था के उत्साह का आयोजन है। योगी सरकार ने आदेश दिया है कि परंपरागत रूप से नृत्य, गीत, संगीत इसका हिस्सा रहे हैं। ऐसे में डीजे, गीत-संगीत आदि की आवाज निर्धारित मानकों के अनुरूप ही हो। डीजे की ऊंचाई एक तय सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। कांवड़ यात्रा मार्ग पर कहीं भी खुले में मांस की खरीद-बिक्री न हो। यात्रा मार्ग को स्वच्छ किया जाए। स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था हो। यात्रा के मार्ग पर जर्जर बिजली के खंभे, लटकते बिजली के तार को सही करवा लिया जाए, जिससे किसी प्रकार की दुर्घटना की स्थिति न आए।योगी ने कहा श्रावण मास के दौरान सोमवार को शिवालयों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं आते हैं। इसलिए पंचायतीराज और नगर विकास विभाग द्वारा शिवालयों के आस-पास समय से सफाई सुनिश्चित की जाए। शरारती तत्वों पर नजर रखी जाए दूसरे संप्रदाय के लोगों को उत्तेजित करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। कांवड़ शिविर लगाने वालों का सत्यापन करें। ड्रोन से भी निगरानी की व्यवस्था की जाए।
बात मोहर्रम की कि जाये तो योगी सरकार ने कहा है कि मुहर्रम जुलूस के दौरान निकलने वाली ताजिया से जुड़ी समितियों और पीस कमेटी के साथ स्थानीय प्रशासन समन्वय बनाकर प्रबंध किए जाएं। विगत वर्ष कुछ स्थानों पर गठित दुर्घटनाओं से सबक लेकर इस वर्ष ताजिया की ऊंचाई परंपरा के अनुरूप ही रखी जाए, ऊंची ताजिया जुलूस में न शामिल हों। प्रशासन द्वारा आम जन को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, लेकिन परंपरा के विरुद्ध कोई कार्य न हो। धार्मिक यात्राओं व जुलूसों में किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। ताजिया वहीं रखे जाएं जहां किसी प्रकार का विवाद न हो।
संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ

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