
बच्चियों के खिलाफ अपराध करने वाले दरिंदों का होगा तुरंत हिसाब
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को जिलाधिकारियों (डीएम) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के साथ सीधे संवाद के जरिए राज्य की कानून-व्यवस्था पर कड़ा संदेश दिया। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने साफ संकेत दिए कि अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस को पूरी स्वतंत्रता के साथ सख्त कार्रवाई करनी होगी।
पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के डीएम-एसपी से विस्तार से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए अधिकारियों को अपराधियों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने के निर्देश दिए। खासतौर पर महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर उन्होंने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर शीघ्र चार्जशीट दाखिल की जाए और न्यायालय के माध्यम से दोषियों को कठोरतम सजा दिलाई जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पीड़ित बच्चियों के मामलों में त्वरित और दृश्यमान कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सख्ती दिखाई। उन्होंने निर्देश दिया कि अत्यंत आवश्यक कार्यों को छोड़कर सभी डीएम और एसपी को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक अनिवार्य रूप से अपने कार्यालय में उपस्थित रहना होगा। इस अवधि में उन्हें आम जनता की शिकायतें सुनकर उनके त्वरित समाधान पर ध्यान देना चाहिए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके। अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सही सोच और प्रतिबद्धता वाले अधिकारियों की तैनाती से अधिकांश समस्याओं का समाधान स्वतः संभव है।
औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में औद्योगिक केंद्र विकसित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में निवेश करने आने वाले उद्योगपतियों को सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए हर निवेशक के साथ एक नामित अधिकारी को जोड़ा जाए, ताकि उन्हें सभी स्तरों पर समुचित सहयोग मिल सके। बैठक में स्मार्ट पुलिसिंग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। आधुनिक तकनीकों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), के उपयोग से अपराध नियंत्रण, डेटा विश्लेषण और निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने ‘डायल 112’ आपातकालीन सेवा को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी घटना पर पुलिस की प्रतिक्रिया समय न्यूनतम किया जा सके।
अंत में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्य प्रदर्शन में सुधार लाने और ठोस परिणाम देने के निर्देश देते हुए घोषणा की कि दो महीने बाद प्रगति की समीक्षा की जाएगी। कार्यशाला में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत समेत कई वरिष्ठ अधिकारी, आईजी-डीआईजी स्तर के अधिकारी और पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा भी उपस्थित रहे।




