
बिहार में पहली बार भाजपा नेतृत्व में बनी सरकार के गठन के महज पंद्रह दिनों के भीतर ही कई महत्वपूर्ण निर्णय सामने आए हैं। इनमें एक फैसला विशेष रूप से राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र और कांग्रेस नेता संजय गांधी के नाम को राज्य की कई संस्थाओं से हटाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा और सोशल मीडिया में वायरल हो गया। सरकार ने राज्य की तीन प्रमुख संस्थाओं संजय गांधी जैविक उद्यान, संजय गांधी जैविक उद्यान प्रबंधन समिति और संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी के नाम बदलने का फैसला किया है। अब इन्हें क्रमशः पटना जू, पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी और बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी के नाम से जाना जाएगा। मंत्रिमंडल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी के अनुसार, कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
पटना स्थित जैविक उद्यान, जो राज्य के प्रमुख वन्यजीव केंद्रों में गिना जाता है, का इतिहास 1970 के दशक से जुड़ा है। इसका औपचारिक स्थापना वर्ष 1973 में हुआ, जबकि इसकी आधारशिला 1969 में रखी गई थी, जब तत्कालीन राज्यपाल नित्यानंद कानूनगो ने राजभवन की 34 एकड़ भूमि इस उद्देश्य के लिए दान में दी थी। बाद में राज्य सरकार ने इसमें अतिरिक्त भूमि जोड़कर इसे विस्तारित किया। उस समय कांग्रेस सरकार होने के कारण इसका नाम संजय गांधी के नाम पर रखा गया। वर्तमान में इस उद्यान में 800 से अधिक वन्यजीव मौजूद हैं, जिनमें लगभग 70 प्रजातियां शामिल हैं। हालांकि, आम जनता के बीच यह स्थल लंबे समय से ‘पटना जू’ के नाम से ही प्रचलित रहा है, जिसे अब सरकार ने आधिकारिक मान्यता दे दी है। इसी क्रम में, 1980 में स्थापित संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी का नाम भी परिवर्तित किया गया है। बिहार पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के अधीन संचालित इस संस्थान की स्थापना राज्य में डेयरी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। उस समय की राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते इसका नाम भी संजय गांधी के नाम पर रखा गया था। अब इसे बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी के रूप में पुनः नामित किया गया है। यह संस्थान डेयरी टेक्नोलॉजी, डेयरी इंजीनियरिंग, डेयरी केमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, दुग्ध प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण और डेयरी प्रबंधन जैसे विषयों में शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करता है।
सरकार के इस निर्णय को लेकर जहां एक ओर समर्थक इसे प्रशासनिक और व्यावहारिक कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक पुनर्संरचना के रूप में देख रहा है। कुल मिलाकर, नाम परिवर्तन का यह निर्णय बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म देता नजर आ रहा है।






