कांग्रेस और शशि थरूर के संबंधों में खटास कोई नई बात नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही कई मौकों पर थरूर द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करने से पार्टी में असहजता बढ़ी है। अब लगातार दो महत्वपूर्ण बैठकों से उनकी गैरहाजिरी ने पार्टी के भीतर उनकी निष्ठा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य और सांसद शशि थरूर दूसरी बार पार्टी की अहम बैठक में उपस्थित नहीं हुए। रविवार को सोनिया गांधी की अगुवाई में हुई कांग्रेस की रणनीति समिति की बैठक में भी उनकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। यह बैठक संसद के शीतकालीन सत्र की तैयारी को लेकर बुलाई गई थी। कुछ दिन पहले एसआईआर मुद्दे पर बुलाई गई बैठक में भी थरूर शामिल नहीं हुए थे। तब उन्होंने बीमारी का हवाला दिया था। लेकिन विवाद तब बढ़ा जब उसी से एक दिन पहले वे प्रधानमंत्री मोदी के एक कार्यक्रम में नजर आए। इसके बाद उनके इंस्टाग्राम पर पीएम की प्रशंसा वाले पोस्ट भी दिखाई दिए, जिसने पार्टी के नेताओं की नाराजगी और बढ़ा दी।
थरूर ने कहा, मां के साथ यात्रा कर रहे थे
थरूर के दफ्तर का कहना है कि वे केरल में थे और अपनी 90 वर्षीय मां के साथ देर वाली फ्लाइट से लौट रहे थे, इसलिए बैठक में भाग नहीं ले पाए। इसी तरह, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल भी स्थानीय चुनावों में व्यस्त होने के कारण बैठक में नहीं पहुंच सके।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने एएनआई से कहा कि थरूर शायद देश की राजनीतिक स्थिति को सही ढंग से समझ नहीं रहे। यदि उन्हें लगता है कि पीएम मोदी या भाजपा की नीतियाँ बेहतर हैं, तो वे कांग्रेस में क्यों बने हुए हैं? अगर वे अपने रुख पर स्पष्टता नहीं लाते, तो यह दोहरा व्यवहार माना जाएगा। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी थरूर के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीएम मोदी के भाषण में उन्हें कोई प्रशंसनीय बात नहीं दिखी, वह लगातार कांग्रेस पर ही हमलावर रहे। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आता कि थरूर को उस भाषण में क्या अच्छा लगा। थरूर और कांग्रेस के बीच पहले से जारी खटपट अब दो अहम बैठकों से उनकी अनुपस्थिति के कारण फिर सुर्खियों में है। इन घटनाओं ने पार्टी में उनके रुख और प्रतिबद्धता को लेकर नए सवाल पैदा कर दिए हैं।





