उन्नाव दुष्कर्म मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व भाजपा नेता कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी अपील लंबित रहने तक सजा निलंबित करते हुए सख्त शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि, सेंगर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में मिली 10 साल की सजा के खिलाफ उनकी याचिका अभी लंबित है, जिसकी सुनवाई 16 जनवरी 2026 को होनी है। सजा निलंबित होने की खबर से जहां सेंगर समर्थकों में खुशी है, वहीं पीड़िता ने इसे अपने लिए खतरा बताया है। जानकारी मिलते ही पीड़िता अपनी मां के साथ दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गई, लेकिन पुलिस ने दोनों को वहां से हटा दिया। पीड़िता का कहना है कि यदि सेंगर जेल से बाहर आए तो वह फिर से धरना देगी।
पूरा मामला वर्ष 2017 का है, जब गांव की एक नाबालिग ने तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। शुरुआती स्तर पर सुनवाई न होने के बाद मामला तूल पकड़ता गया। अप्रैल 2018 में प्रदेश सरकार की संस्तुति पर केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच को मंजूरी दी। इसके बाद सीबीआई ने 13 अप्रैल 2018 को कुलदीप सेंगर को उनके लखनऊ स्थित आवास से गिरफ्तार किया। लंबी जांच और दिल्ली की तीस हजारी अदालत में चली सुनवाई के बाद 16 दिसंबर 2019 को कोर्ट ने कुलदीप को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी ठहराया। 20 दिसंबर 2019 को उन्हें उम्रकैद और 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई, जिसके चलते उनकी विधायकी भी समाप्त हो गई। बाद में मार्च 2020 में पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में कुलदीप और उनके भाई अतुल सेंगर को 10-10 साल की सजा हुई।
करीब छह साल से तिहाड़ जेल में बंद कुलदीप सेंगर की सजा को अब 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और कई शर्तों के साथ निलंबित किया गया है। इस फैसले की जानकारी मिलते ही उनका परिवार और समर्थक दिल्ली पहुंच गए। वहीं, पीड़िता और उसके परिवार का आरोप है कि सेंगर के जेल से बाहर आने से पहले ही उन्हें धमकियां मिलनी शुरू हो गई हैं। पीड़िता की बहन का कहना है कि पहले पिता की हत्या कराई गई, फिर न्याय के लिए लड़ने वाले चाचा को झूठे मामलों में फंसाया गया। दूसरी ओर, कुलदीप सेंगर की मौसी सरोज सिंह ने उन्हें साजिश का शिकार बताते हुए कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते उन्हें फंसाया गया है और उन्हें न्यायालय व ईश्वर पर पूरा भरोसा है।
करीब 25 साल के राजनीतिक सफर में कुलदीप सेंगर ग्राम प्रधान से लेकर चार बार विधायक बने, लेकिन उन्नाव दुष्कर्म कांड के बाद उनका राजनीतिक साम्राज्य पूरी तरह ढह गया। यह मामला न केवल एक व्यक्ति के पतन की कहानी है, बल्कि न्याय, राजनीति और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में भाजपा नेता कुलदीप सेंगर की राजनीति का अंत






