
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, तटों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जापान मार्च 2028 तक प्रस्तावित ‘शील्ड’ प्रणाली के तहत निगरानी और रक्षा के लिए बड़े पैमाने पर मानव रहित हवाई, समुद्री सतह और पनडुब्बी ड्रोन तैनात करेगा। इस परियोजना पर करीब 100 अरब येन (लगभग 640 मिलियन अमेरिकी डॉलर) खर्च किए जाएंगे।
शुक्रवार को जापान के मंत्रिमंडल ने आगामी वर्ष के लिए 9 ट्रिलियन येन (करीब 58 बिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक के रक्षा बजट को मंजूरी दी। यह अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए क्रूज मिसाइलों, मानवरहित हथियारों के जरिए जवाबी हमला करने की क्षमता और तटीय सुरक्षा को मजबूत करना है।
अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष 2026 के लिए तैयार किया गया बजट मसौदा 2025 की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक है। यह जापान की चल रही पांच वर्षीय योजना का चौथा वर्ष है, जिसके तहत हथियारों पर होने वाले वार्षिक खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 2 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
चीन के साथ तनाव के बीच अहम फैसला
रक्षा बजट में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब चीन के साथ जापान का तनाव लगातार बढ़ रहा है। नवंबर में प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ कोई कदम उठाता है तो जापानी सेना हस्तक्षेप कर सकती है। ताइवान एक स्वशासित द्वीप है, जिसे चीन अपने अधीन मानता है।
अमेरिका के दबाव के बीच ताकाइची सरकार ने मार्च तक रक्षा खर्च को जीडीपी के 2 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य तय समय से दो साल पहले हासिल करने का वादा किया है। इसके साथ ही जापान दिसंबर 2026 तक अपनी मौजूदा सुरक्षा और रक्षा नीतियों में संशोधन करने की योजना पर भी काम कर रहा है।
क्रूज मिसाइलों और ड्रोन पर विशेष जोर
मिसाइलों और ड्रोन की तैनाती से दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों की सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा। दुश्मन के ठिकानों पर दूर से हमला करने की क्षमता बढ़ाने के लिए जापान ने लंबी दूरी की मिसाइलों को अपनी रणनीति में शामिल किया है। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनाए गए उस सिद्धांत से बड़ा बदलाव है, जिसमें सैन्य बल के उपयोग को केवल आत्मरक्षा तक सीमित रखा गया था। 2022 में लागू की गई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में चीन को जापान के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बताया गया है। अमेरिका के साथ सुरक्षा गठबंधन के तहत जापान के आत्मरक्षा बलों को अधिक सक्रिय और आक्रामक भूमिका निभाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
टाइप-12 मिसाइलों की तैनाती
नए बजट में ‘स्टैंडऑफ’ मिसाइल क्षमता को मजबूत करने के लिए 970 अरब येन (लगभग 6.2 अरब अमेरिकी डॉलर) से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसमें देश में विकसित और उन्नत टाइप-12 सतह से जहाज पर मार करने वाली मिसाइलों की 177 अरब येन (करीब 1.13 अरब अमेरिकी डॉलर) की खरीद शामिल है, जिनकी मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर है। टाइप-12 मिसाइलों की पहली खेप मार्च तक दक्षिण-पश्चिमी कुमामोटो प्रांत में तैनात की जाएगी, जो तय समय से एक वर्ष पहले है। क्षेत्र में मिसाइल उत्पादन को तेज किए जाने के पीछे सरकार का तर्क है कि बढ़ती उम्र की आबादी, घटती जनसंख्या और सीमित सैन्य कर्मियों के कारण मानवरहित हथियार भविष्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।






