
बीएचयू के चिकित्सकों ने हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में प्यास न लगने पर भी गुनगुना पानी पीते रहना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। नियमित और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से यूरिन का प्रवाह बना रहता है और शरीर में किसी तरह की परेशानी नहीं होती।
सर्दी और घने कोहरे के चलते बीएचयू अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में फिजिशियन, हृदय रोग और न्यूरोलॉजी विभागों में मरीजों की संख्या करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। डॉक्टर न केवल दवाएं दे रहे हैं, बल्कि सर्दी से बचाव और स्वस्थ रहने के घरेलू उपाय भी बता रहे हैं। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को सुबह जल्दी टहलने से बचने, मौसम के अनुसार गर्म कपड़े पहनने और गुनगुना पानी पीते रहने की सलाह दी जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, ठंड का सबसे अधिक असर नसों पर पड़ता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और खून के थक्के जमने की आशंका बढ़ जाती है।
सर्दियों में पानी पीने का फार्मूला
डॉक्टरों के अनुसार, यदि शरीर का वजन 60–70 किलोग्राम या उससे अधिक है तो रोजाना कम से कम ढाई लीटर पानी पीना चाहिए। इससे कम वजन वाले लोगों के लिए दो लीटर पानी पर्याप्त है। सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी जरूर पिएं। भोजन से आधे घंटे पहले, व्यायाम के बाद और प्यास लगने पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें, इससे शरीर स्वस्थ बना रहता है।
डॉ. ममता तिवारी (स्वस्थवृत्त एवं योग विभाग, आयुर्वेद संकाय, आईएमएस बीएचयू) के अनुसार, हल्का गुनगुना पानी पीना चाहिए। पर्याप्त पानी पीने से गैस और पेट से जुड़ी समस्याएं नहीं होतीं। सर्दी में अचानक ठंडा पानी पीने से यूरिन और सीने में जकड़न जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आलोक सिंह का कहना है कि सर्दियों में रक्त प्रवाह सामान्य दिनों की तुलना में कम हो जाता है। हृदय रोगियों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही पानी पीना चाहिए, जबकि स्वस्थ लोगों को रोजाना कम से कम ढाई लीटर पानी जरूर लेना चाहिए। तरल पदार्थों की कमी नहीं होने देनी चाहिए।
हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. ओमशंकर ने बताया कि सुबह-सुबह घर से बाहर निकलने और अचानक भारी सामान उठाने से बचना चाहिए, क्योंकि इसी समय हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है। मसालेदार और अधिक तेलयुक्त भोजन से परहेज जरूरी है।
न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा के अनुसार, सर्दियों में नसों में सिकुड़न बढ़ जाती है, जिसका असर दिमाग पर पड़ता है और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ठंड के कारण रक्त प्रवाह कम होता है, इसलिए शरीर को हमेशा गर्म रखना जरूरी है। सामान्य दिनों में जहां ओपीडी में ब्रेन स्ट्रोक के लगभग 10 मरीज आते थे, वहीं नवंबर के बाद यह संख्या बढ़कर करीब 30 हो गई है।






