रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर के जब्त किए जाने के बाद रूस में अमेरिका के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इस घटना से नाराज़ एक वरिष्ठ रूसी सांसद ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए यहां तक कह दिया कि जरूरत पड़ने पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से भी पीछे नहीं हटेंगे।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाने वाले नेता और रूस की रक्षा समिति के उपाध्यक्ष एलेक्सी जुरावलेव ने इस कार्रवाई को अमेरिका की “समुद्री डकैती” करार दिया। उन्होंने कहा कि उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी ध्वज के तहत चल रहे तेल टैंकर को जब्त करना रूस के क्षेत्र पर हमले के समान है।अमेरिकी सेना ने सात जनवरी को उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी ध्वज वाला तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ जब्त किया था, जिसे पहले बेला-1 के नाम से जाना जाता था। इस कदम के बाद जुरावलेव ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मॉस्को को इसका सैन्य जवाब देना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी जहाजों पर टॉरपीडो हमले और इस कार्रवाई में शामिल अमेरिकी तटरक्षक बल की नौकाओं को निशाना बनाने तक की बात कही।
टेलीग्राम पर जारी बयान में जुरावलेव ने दावा किया कि अमेरिका को रोकने का यही एकमात्र तरीका है। उन्होंने आरोप लगाया कि वेनेजुएला में हालिया अभियान के बाद अमेरिका मनमाने ढंग से कार्रवाई कर रहा है। रूसी सैन्य सिद्धांत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों पर हमले की स्थिति में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का प्रावधान है।
जुरावलेव ने कहा, “एक सशस्त्र अमेरिकी बेड़े द्वारा एक नागरिक पोत पर कब्जा करना समुद्री डकैती का सबसे स्पष्ट उदाहरण है। चूंकि टैंकर रूसी राष्ट्रीय ध्वज के तहत संचालित हो रहा था, इसलिए यह हमारे क्षेत्र पर हमला माना जाना चाहिए और इसका तुरंत कठोर जवाब दिया जाना चाहिए।”
रूसी सांसद का यह बयान परमाणु हथियारों से लैस दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। जानकारी के अनुसार, कई हफ्तों तक पीछा करने के बाद अमेरिकी तटरक्षक बल ने बुधवार को उत्तरी अटलांटिक महासागर में इस रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर को जब्त किया। यह टैंकर वेनेजुएला के पास प्रतिबंधित तेल टैंकरों की अमेरिकी नाकाबंदी से दो सप्ताह से अधिक समय तक बचता रहा था।




