
भारत और नामीबिया ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस समझौते के तहत भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) सेवा को नामीबिया में लागू किया जाएगा। इसके लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और नामीबिया के केंद्रीय बैंक के बीच लाइसेंसिंग करार हुआ है। यह पहली बार है जब भारत ने किसी देश के केंद्रीय बैंक के साथ इस तरह की साझेदारी की है।
विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नामीबिया यात्रा के दौरान इसकी जानकारी दी। मंत्रालय के सचिव डॉ. डम्मू रवि ने बताया कि इस पहल का मकसद नामीबिया में रीयल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली की शुरुआत करना है। यह करार एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) और बैंक ऑफ नामीबिया के बीच संपन्न हुआ है। इससे नामीबिया में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को भी डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा सकेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने नामीबिया की संसद में अपने संबोधन में कहा कि अब लोग “तानगी उनेने” कहने से पहले ही पैसे भेज सकेंगे। बहुत जल्द कुनिने की कोई बुजुर्ग दादी या कटुतुरा का कोई दुकानदार भी केवल एक टैप से लेन-देन कर सकेगा, वो भी स्प्रिंगबोक की रफ्तार से तेज।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नामीबिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान द ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एनशिएंट वेलविचिया मिराबिलिस से भी सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार 1995 में स्थापित हुआ था और इसे नामीबिया के अद्वितीय रेगिस्तानी पौधे ‘वेलविचिया मिराबिलिस’ के नाम पर रखा गया है, जो संघर्ष, धैर्य और दृढ़ निश्चय का प्रतीक माना जाता है। यह प्रधानमंत्री मोदी को मिला 27वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है और इस दौरे का चौथा पुरस्कार है।






