बांग्लादेश की एक अदालत ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं और उनके विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। यह मामला देश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में सुना जाएगा। यह ट्रिब्यूनल युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए स्थापित किया गया था और इसकी कानूनी ताकत बांग्लादेश में काफी अहम मानी जाती है।
शेख हसीना पर कौन-कौन से आरोप लगे हैं?
• हिंसा को बढ़ावा देना और आम नागरिकों के खिलाफ अपराधों में संलिप्तता
• हत्या और हत्या के प्रयास
• प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति देना
• सशस्त्र समर्थकों और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई हिंसा को रोकने में विफल रहना
• एक छात्र अबु सैयद की हत्या में शामिल होना
इसके अतिरिक्त, उन पर ढाका और अशुलिया क्षेत्रों में छह-छह निहत्थे लोगों और छात्रों की गोलीबारी में मौत की जिम्मेदारी का भी आरोप है।
क्या है अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण?
यह ट्राइब्यूनल 1971 के युद्ध अपराधियों पर मुकदमा चलाने के उद्देश्य से 1973 में कानून के तहत स्थापित किया गया था। हालांकि, पाकिस्तान के साथ राजनयिक समझौते के बाद इसे निष्क्रिय कर दिया गया था। लेकिन 2009 में शेख हसीना ने सत्ता में आने के बाद इस कानून में संशोधन कर न्यायाधिकरण को दोबारा सक्रिय किया। इसके तहत अब न केवल सैन्य कर्मियों बल्कि आम नागरिकों, नेताओं और अधिकारियों पर भी मुकदमा चलाया जा सकता है।
शेख हसीना के खिलाफ मामला क्यों उठा?
2024 में बांग्लादेश में आरक्षण नीति के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। आरोप है कि शेख हसीना ने भड़काऊ बयान दिए, जिसके चलते आंदोलन उग्र हो गया। हिंसा में 400 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। अब उन्हीं घटनाओं को आधार बनाकर उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
प्रत्यर्पण की संभावना कितनी?
बांग्लादेश सरकार की ओर से भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की कोशिश की जा सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से दोनों देशों के राजनयिक संबंधों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। यह देखना बाकी है कि भारत इस अनुरोध को किस रूप में लेता है।






