
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत के दो दिवसीय दौरे पर अहमदाबाद पहुंचे हैं। उनके इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से महत्वपूर्ण मुलाकात प्रस्तावित है, जिसमें करीब 52,500 करोड़ रुपये के पनडुब्बी सौदे को लेकर सहमति बन सकती है। माना जा रहा है कि यह करार भारतीय नौसेना और देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
सोमवार को भारत-जर्मनी संबंधों में एक अहम प्रगति देखने को मिल सकती है। दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज गुजरात के अहमदाबाद पहुंचे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी उच्चस्तरीय बैठक तय है। बातचीत में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, अत्याधुनिक तकनीक और भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम पनडुब्बी परियोजना जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। फ्रेडरिक मर्ज का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब वैश्विक स्तर पर राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। भारत और जर्मनी दोनों ही रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के इच्छुक हैं। पीएम मोदी और मर्ज के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने, निवेश को बढ़ावा देने और रणनीतिक साझेदारी को आगे ले जाने पर विचार-विमर्श होगा। जर्मन चांसलर बनने के बाद मर्ज का यह एशिया का पहला दौरा है, जिसे कूटनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।
पनडुब्बी सौदे पर क्यों है खास नजर?
इस यात्रा का प्रमुख केंद्र भारतीय नौसेना के लिए छह अत्याधुनिक पनडुब्बियों की प्रस्तावित खरीद है। अनुमानित तौर पर यह सौदा 52,500 करोड़ रुपये का हो सकता है। इसके तहत जर्मनी की प्रतिष्ठित रक्षा कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स और भारत की माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के बीच साझेदारी की संभावना है। यह करार भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को उल्लेखनीय रूप से सशक्त करेगा।
इस डील से भारत को मिलने वाले लाभ:
- भारतीय नौसेना की ताकत और परिचालन क्षमता में वृद्धि
- स्वदेशी रक्षा निर्माण को प्रोत्साहन
- उन्नत जर्मन पनडुब्बी तकनीक तक पहुंच
- रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती
- हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और सुदृढ़
वैश्विक मुद्दों पर भी मंथन संभव
सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी और जर्मन चांसलर की बातचीत केवल द्विपक्षीय विषयों तक सीमित नहीं रहेगी। यूक्रेन संकट, वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हो सकता है। यह बैठक ऐसे दौर में हो रही है, जब विश्व के कई हिस्सों में राजनीतिक और सैन्य अस्थिरता देखने को मिल रही है।
अहमदाबाद में तय कार्यक्रम
अहमदाबाद प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के अलावा फ्रेडरिक मर्ज साबरमती आश्रम का दौरा करेंगे। इसके साथ ही वे पतंग महोत्सव और एक कौशल विकास कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। जर्मन चांसलर का यह दौरा केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो भारत-जर्मनी संबंधों की बहुआयामी और मजबूत होती साझेदारी को दर्शाता है।






