
डोली उठाने की थी तैयारी, पर उठानी पड़ी अर्थी
बृहस्पतिवार को कैप्टन शांभवी पाठक की अंतिम विदाई के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। उन्हें अंतिम विदा देने पहुंचे लोगों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। शांभवी की जिंदगी में खुशियों का नया अध्याय शुरू होने ही वाला था। परिजनों के अनुसार, मार्च महीने में उसकी शादी तय थी।
दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव स्थित ए-1 ब्लॉक की वह गली, जो कुछ दिन पहले तक खुशियों से गुलजार थी, आज पूरी तरह खामोश नजर आई। इसी गली में हाल ही में नए घर में बसने की खुशी, रिश्तेदारों की आवाजाही, गृह प्रवेश और शादी की तैयारियों की चहल-पहल थी, लेकिन अब वहां सन्नाटा पसरा हुआ है।
सफदरजंग एन्क्लेव ए-1 स्थित मकान नंबर 313 के दरवाजे बंद हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो घर के भीतर समय थम सा गया हो। यह वही घर है, जहां महाराष्ट्र के बारामती विमान हादसे में जान गंवाने वाली को-पायलट शांभवी पाठक रहती थीं। उनकी असमय मृत्यु ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार हाल ही में इस मकान में शिफ्ट हुआ था। बेटी की मौत की खबर ने पल भर में सभी खुशियों को मातम में बदल दिया। पड़ोसियों के अनुसार, शांभवी बेहद शांत, विनम्र और सुलझे हुए स्वभाव की थीं। वहीं, इलाके में तैनात सुरक्षा गार्ड ने बताया कि वह अपने परिवार से बहुत जुड़ी हुई थीं और नए घर को लेकर काफी खुश थीं।
शांभवी की मां अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में जुटी थीं। नए कपड़े, गहने और भविष्य के सपने संजोए जा रहे थे। एक मां हर दिन अपनी बेटी को दुल्हन के रूप में देखने का सपना देख रही थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जहां डोली उठने की तैयारी थी, वहां शांभवी की अर्थी उठानी पड़ी। अंतिम संस्कार के दौरान हर आंख नम थी। करीब 25 वर्षीय शांभवी पाठक वीएसआर वेंचर्स के लियरजेट-45 विमान में फर्स्ट ऑफिसर (को-पायलट) के पद पर कार्यरत थीं। उनकी मां वायुसेना के बाल भारती स्कूल में शिक्षिका हैं, पिता वायुसेना से सेवानिवृत्त पायलट हैं, जबकि छोटा भाई भारतीय नौसेना में सेवाएं दे रहा है। पड़ोस में ब्यूटी पार्लर चलाने वाली शिल्पी ने बताया कि शांभवी बेहद सौम्य, मधुर और शांत स्वभाव की थीं। वहीं, सुरक्षा गार्ड जितेंद्र के अनुसार, वह जब भी सामने आती थीं, हमेशा मुस्कुराकर नमस्ते करती थीं। उनका पूरा परिवार अत्यंत विनम्र था और समाज में सभी से सम्मानपूर्वक व्यवहार करता था।





