
मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को
दिल्ली शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपमुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर उनका जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है। सीबीआई ने अपनी याचिका में कहा है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के कुछ हिस्से तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और उन्हें चुनौती दी जानी आवश्यक है। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील देते हुए कहा कि निचली अदालत का फैसला आपराधिक कानून की स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं लगता। सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि मामले में सबूतों को नष्ट किए जाने के कई उदाहरण रिकॉर्ड में मौजूद हैं। एजेंसी के मुताबिक करीब 170 मोबाइल फोन नष्ट किए गए, जिसका जिक्र भी अदालत के समक्ष किया गया है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आपराधिक मामले की शुरुआती अवस्था में गवाहों के बयानों की पूर्ण पुष्टि करना जरूरी नहीं होता। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां पहले गवाहों के बयान दर्ज करती हैं और उन्हें केस रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाता है। इसके बाद जब मुकदमे की विधिवत सुनवाई शुरू होती है, तब गवाहों को अदालत में पेश किया जाता है, जहां बचाव पक्ष को उनसे जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) करने का पूरा अवसर मिलता है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से गवाहों के बयानों की विश्वसनीयता और सत्यता की जांच होती है।
दिल्ली हाई कोर्ट में यह सुनवाई सीबीआई की उस याचिका पर हुई, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया गया था। मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सीबीआई की दलीलें सुनने के बाद सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए उनका पक्ष मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की है।






