
पश्चिम एशिया में युद्धविराम के ऐलान के बाद अब पर्दे के पीछे कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह चाहता है कि अमेरिकी पक्ष का प्रतिनिधित्व केवल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करें। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने ट्रंप प्रशासन को स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व सलाहकार जेरेड कुश्नर के साथ दोबारा वार्ता नहीं करना चाहता। तेहरान की प्राथमिकता जेडी वेंस के साथ सीधे संवाद की है। यह जानकारी अमेरिकी मीडिया संस्थान सीएनएन के हवाले से सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान को स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर के साथ बातचीत में भरोसे की कमी महसूस होती है। गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले से पहले यही दोनों अधिकारी वार्ता में शामिल थे, लेकिन वह बातचीत सफल नहीं हो सकी थी। वहीं, जेडी वेंस को युद्ध समाप्त करने के पक्षधर के रूप में देखा जाता है और खबरें हैं कि वे ईरान पर हमले के समर्थन में नहीं थे। यही कारण है कि ईरान उन्हें अन्य अमेरिकी नेताओं के मुकाबले अधिक गंभीर और संतुलित वार्ताकार मान रहा है।
व्हाइट हाउस का रुख
इस मुद्दे पर व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि अमेरिका की ओर से वार्ता का नेतृत्व कौन करेगा, इसका अंतिम निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही लेंगे। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि उनकी पूरी कूटनीतिक टीम जेडी वेंस, मार्को रुबियो, जेरेड कुश्नर, स्टीव विटकॉफ और वे स्वयं बातचीत की प्रक्रिया में शामिल हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका इस युद्ध में बढ़त हासिल कर चुका है और ईरान की नौसेना व वायुसेना को भारी नुकसान हुआ है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी दोहराया कि बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि का चयन केवल राष्ट्रपति ट्रंप के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति वेंस, विदेश मंत्री रुबियो, विशेष दूत विटकॉफ और जेरेड कुश्नर, सभी वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा रहेंगे।
मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका पर चर्चा
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक सोशल मीडिया पोस्ट को साझा किया, जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय संकट के समाधान में पाकिस्तान की भूमिका निभाने की इच्छा जताई थी।
शहबाज शरीफ ने कहा कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों, तो पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक और निर्णायक वार्ता की मेजबानी के लिए तैयार है और इसे सम्मान की बात मानेगा।






