
सिर्फ़ 20 मिनट में होगी बोर्डिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। दोपहर करीब 12 बजे उन्होंने एयरपोर्ट के पहले चरण (फेज-1) का औपचारिक शुभारंभ किया। यह परियोजना देश के विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। एयरपोर्ट के पहले चरण में लगभग 3300 एकड़ क्षेत्र में टर्मिनल और एक रनवे का निर्माण किया गया है। इस टर्मिनल की सालाना यात्री क्षमता करीब 3 करोड़ रखी गई है। फेज-1 को विकसित करने में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है। पूरे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। सभी चार चरण पूरे होने के बाद यह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की ओर अग्रसर है। वर्तमान में यह स्थान चीन के बीजिंग डेक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास है, जिसका क्षेत्रफल करीब 47 वर्ग किलोमीटर है।
परियोजना को वर्ष 2040 तक पूर्ण रूप से तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यहां से उड़ानों का संचालन मई से शुरू होने की संभावना है। इस एयरपोर्ट की खासियत यह होगी कि यात्रियों को प्रवेश के बाद 20 मिनट से भी कम समय में बोर्डिंग की सुविधा मिल सकेगी, जिससे यात्रा प्रक्रिया तेज और सुगम बनेगी।
एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के बाद यात्रियों को लगभग 60 मीटर लंबे कॉरिडोर से गुजरना होगा, जिससे एंट्री से बोर्डिंग गेट तक पहुंचने में कम समय लगेगा। तुलना करें तो दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर यह दूरी तय करने में आमतौर पर 15 से 30 मिनट लग जाते हैं। डिपार्चर एरिया में सबसे पहले चेक-इन काउंटर स्थापित किए गए हैं। शुरुआती संचालन के लिए इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर के साथ समझौते किए गए हैं। इन एयरलाइंस के काउंटर तैयार हैं और स्टाफ द्वारा चेक-इन की ट्रायल प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यात्री यहां आसानी से बैगेज ड्रॉप कर सकेंगे और बोर्डिंग पास प्राप्त कर पाएंगे।






