
पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका–इज़राइल और ईरान के बीच टकराव अब वैश्विक चिंता का बड़ा कारण बन चुका है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से नियंत्रण स्थापित करने की तैयारी में जुटा है, जिससे ईरान को बड़ा झटका लग सकता है।
करीब एक महीने से अधिक समय से चल रहे इस संघर्ष के बीच अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिकी या सहयोगी देशों के संयुक्त नौसैनिक बेड़े के जरिए इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल कुछ देश ईरान के साथ समझौता कर अपने जहाजों को सुरक्षित रूप से इस रास्ते से निकाल रहे हैं, लेकिन भविष्य में अमेरिका इस मार्ग की सुरक्षा और संचालन अपने हाथ में लेना चाहता है। बेसेंट के अनुसार, वैश्विक बाजार में फिलहाल तेल की आपूर्ति संतुलित है और रोजाना बड़ी संख्या में जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं। बावजूद इसके, अमेरिका का अंतिम लक्ष्य इस रणनीतिक मार्ग पर स्थायी नियंत्रण स्थापित करना है, ताकि समुद्री यातायात निर्बाध और सुरक्षित बना रहे।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताएं इसलिए भी बढ़ी हैं क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और समुद्री सुरक्षा पर गहरा असर डाल सकता है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक क्षमता और रक्षा ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। एबीसी न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान की मिसाइल प्रणालियों और रक्षा उद्योग को कमजोर कर रहा है, ताकि वह भविष्य में सैन्य क्षमता विकसित न कर सके। रूबियो ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन ईरान को खाड़ी क्षेत्र में स्थायी नियंत्रण हासिल नहीं करने देगा।
ईरान की ओर से दी जा रही धमकियों पर भी रूबियो ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास कई विकल्प मौजूद हैं और यदि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिश की, तो उसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए अमेरिका की कूटनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका बार-बार अपनी नीतियां बदलता रहा है, जबकि ईरान का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है। इसी बीच, ईरान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा आयोजित चार देशों की बैठक से दूरी बनाकर क्षेत्रीय कूटनीति में भी अपनी अलग स्थिति जाहिर की है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता में कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि जल्द समझौता नहीं हुआ और होर्मुज का मार्ग खुला नहीं रहा, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे—जैसे बिजली संयंत्र, तेल कुएं और खार्ग द्वीप—को निशाना बना सकता है।
गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आ रहा है जब अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और वैश्विक समुदाय की नजरें अब इस संवेदनशील क्षेत्र पर टिकी हुई हैं। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान के प्रभाव को सीमित करना है।






